पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा के इस्तीफे की खबरों और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने मदन मित्रा के इस्तीफे और पार्टी के भीतर चल रही उठापटक को लेकर कहा कि भाजपा को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन नेता किस पार्टी में जा रहा है या किसके साथ खड़ा हो रहा है। उनका कहना था कि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य पश्चिम बंगाल की जनता का विकास करना है और राज्य को भ्रष्टाचार तथा राजनीतिक हिंसा से मुक्त कराना है। लॉकेट चटर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस अब धीरे-धीरे समाप्त होती हुई पार्टी बन चुकी है और उसके भीतर लगातार असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के नेताओं को अब अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है, इसलिए वे अलग-अलग विकल्प तलाश रहे हैं। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और जनता का भरोसा भी लगातार कम हो रहा है।
उनके अनुसार टीएमसी सरकार विकास के बजाय केवल सत्ता बचाने की राजनीति में लगी हुई है। लॉकेट चटर्जी ने कहा, "कौन किसके पास जा रहा है, इससे हमें कोई मतलब नहीं है। हमारा एक ही मकसद है कि जनता का विकास हो। टीएमसी अपने आप खत्म हो चुकी पार्टी है और अब बचने के लिए उसके नेता इधर-उधर जा रहे हैं। यह उनका आंतरिक मामला है।" भाजपा का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला, पंचायत चुनावों में हिंसा और प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण टीएमसी की छवि लगातार कमजोर हुई है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करती रही है और भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाती है। मदन मित्रा के इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रम के बीच दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर भाजपा और टीएमसी आमने-सामने हैं तथा दोनों दल अपने-अपने दावों के माध्यम से जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस राजनीतिक विवाद का राज्य की राजनीति और चुनावी रणनीतियों पर कितना प्रभाव पड़ता है।