काश दिल्ली वाले अग्निकांड से प्रशासन सबक ले लेता तो लखनऊ में 15 घरों के चिराग ना बुझते, लखनऊ की जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां सिर्फ इंसानी जिंदगियां ही नहीं गई, वहां कई जानवर भी झुलस कर मर गए। हर बार हादसे के बाद मुआवजे की घुट्टी पिला दी जाती है, लेकिन हर बार ऐसा हादसा हो कैसे रहा है। मुआवजे का मरहम क्या प्रशासन की सुस्ती को छुपा देता है? 1 लाख 2 लाख जैसे मुआवजे देकर कब तक नियमों की अनदेखी पर पर्दा डाला जाता रहेगा। बिना फायर NOC के कई कोचिंग सेंटर्स और होटल्स अमूमन ज्यादातर राज्यों में चलते हैं।