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Lok Sabha Party Position List: उद्धव के बागी सांसदो को विलय की मंजूरी,TMC के बागी सांसद बैठेंगे अलग!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sun, 19 Jul 2026 04:30 AM IST

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसदों की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि लोकसभा सचिवालय ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में उद्धव गुट के छह सांसदों के विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर अब आधिकारिक रूप से शिंदे गुट के सांसद माने जाएंगे। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे लोकसभा में शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत हुई है, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नुकसान माना जा रहा है। 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके साथ आए छह सांसद किसी निजी लाभ या व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण नहीं जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह यह कहें कि सांसदों ने बिना किसी निजी फायदे के यह फैसला लिया है तो कुछ लोग इस पर विश्वास नहीं करेंगे, क्योंकि आरोप लगाने वालों की सोच केवल पैसे तक सीमित है। शिंदे ने कहा कि जो लोग लगातार खरीद-फरोख्त के आरोप लगाते हैं, वे हर राजनीतिक फैसले को उसी नजरिए से देखते हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ आए सांसद विकास के एजेंडे और अपने क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए शिवसेना में शामिल हुए हैं। शिंदे ने यह भी कहा कि उनकी सरकार इन सांसदों के संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि इन सांसदों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी बैठक कराई गई है, ताकि उनके क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विभागों के लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा सके।

एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में अक्सर यह धारणा बना दी जाती है कि यदि कोई नेता किसी दल को छोड़कर दूसरे दल में जाता है तो उसने पैसे लेकर ऐसा किया होगा, लेकिन जब वही नेता पहले उस दल में होता है तो उसे अच्छा माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह दोहरा मापदंड उचित नहीं है और ऐसे आरोप लगाने वालों को पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को यह समझने की आवश्यकता है कि यदि उनके अपने सांसद या विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं तो उसके पीछे के कारणों का ईमानदारी से विश्लेषण करना चाहिए। शिंदे ने कहा कि केवल आरोप लगाने से राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जनता के हित में विकास कार्यों और बेहतर नेतृत्व पर ध्यान देना ही लोकतंत्र की सही दिशा है।




 

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