वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की किरकिरी होना कोई नई बात नहीं है। चाहे मामला आतंकवाद पर सवालों का हो, वित्तीय संकटों का हो या अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का पाकिस्तान को बार-बार ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है, जब उसे दुनिया के सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। हाल ही में एक बार फिर ऐसी ही स्थिति तब बनी जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाषण देने पहुंचे। यह बैठक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे संवेदनशील और भविष्य-निर्माण करने वाले विषय पर आयोजित की गई थी।
ख्वाजा आसिफ ने अपने भाषण में एआई के फायदे और नुकसान पर बात करने की कोशिश की। उन्होंने एआई को "दोहरे उपयोग वाली तकनीक" करार देते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल जहां सामाजिक-आर्थिक तरक्की और विकास में मदद कर सकता है, वहीं अगर गलत तरीके से उपयोग हुआ तो यह वैश्विक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि एआई के सैन्य इस्तेमाल से अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में एआई तकनीक को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए। हालांकि, ख्वाजा आसिफ का यह भाषण उस तरह से असरदार नहीं बन पाया जैसा वे चाहते थे। कारण यह था कि वे भाषण के दौरान लगातार अटकते रहे। रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, उन्होंने अपने छोटे से संबोधन में सात बार से भी ज्यादा अटक कर वाक्यों को दोहराया और कई शब्दों का गलत उच्चारण कर दिया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया गया यह भाषण सोशल मीडिया पर तुरंत चर्चा का विषय बन गया। पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं और आम जनता ने इस पर जमकर प्रतिक्रिया दी और उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ख्वाजा आसिफ का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे अपने विचार रखते समय बार-बार वाक्यों को दोहराते और झिझकते दिखाई दिए। कई यूजर्स ने कटाक्ष किया कि पाकिस्तान का प्रतिनिधि जब विश्व मंच पर इस तरह से बोलता है, तो यह देश की साख को और कम करता है। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान को भाषण देने से पहले अपने नेताओं को बेहतर ट्रेनिंग देनी चाहिए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय सभाओं में देश की छवि खराब न करें। हालांकि, अगर उनके भाषण की सामग्री को देखें, तो ख्वाजा आसिफ ने कुछ अहम बिंदुओं पर ध्यान खींचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि एआई आधारित हथियारों और नियंत्रण प्रणालियों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। खासतौर पर जब ऐसी तकनीकों में मानव का कोई सक्रिय नियंत्रण न हो। उनका तर्क था कि यदि मशीनें अपने आप निर्णय लेने लगें, तो इससे युद्ध छेड़े जाने की संभावना और अधिक बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि एआई का सैन्य उपयोग फैसले लेने का समय कम कर देता है और कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करता है।