केरल स्थानीय निकाय चुनाव में BJP का कमाल देखने को मिला है लेफ्ट के गढ़ में बीजेपी ने कई इलाकों में जीत दर्ज की जबकि इस बीच चर्चा एक सीट को लेकर खूब हो रही है ये सीट अपने आप में इस लिए अहम है क्यों की यहां वक्फ विवाद पिछले 70 साल से चल रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है.दरहसल केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित मुनंबम जो पिछले कई वर्षों से वक्फ बोर्ड और स्थानीय ईसाई परिवारों के बीच भूमि विवाद को लेकर सुर्खियों में रहा है, अब राजनीतिक रूप से भी बड़ा संकेत दे गया है। स्थानीय निकाय चुनाव में एनडीए ने मुनंबम वार्ड में निर्णायक जीत दर्ज की है। यह वही इलाका है, जहां कांग्रेस ने पिछला चुनाव जीता था। मुनंबम इलाका ये वही इलाका है जहां वक्फ प्रॉपर्टी विवाद चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मुनंबम में करीब 500 ईसाई परिवार रहते हैं, लेकिन वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद उन्हें अपने घरों से बेदखल हो जाने का डर सता रहा था. केरल BJP और मोदी सरकार ने इन परिवारों का साथ दिया, जिसके परिणाम स्वरूप इन परिवारों ने चुनाव में BJP को समर्थन दिया.
अब विवाद की अगर बात करें तो मुनंबम में विवाद की जड़ साल 2019 में पड़ी, जब केरल वक्फ बोर्ड ने 404 एकड़ से ज्यादा जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। इस जमीन पर करीब 500 परिवार, जिनमें अधिकांश ईसाई समुदाय से हैं, पीढ़ियों से रह रहे हैं। वक्फ बोर्ड के दावे के बाद इन परिवारों को बेदखली का डर सताने लगा। इसी के विरोध में मुनंबम लैंड प्रोटेक्शन काउंसिल के बैनर तले लोगों ने 400 दिनों से ज्यादा समय तक प्रदर्शन किए। हालात ऐसे बने कि सरकार ने इन जमीनों पर लैंड टैक्स लेना भी बंद कर दिया। केरल बीजेपी के महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने इसे NDA की “ऐतिहासिक जीत” बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी ने वक्फ विवाद में मुनंबम के लोगों के साथ खड़े रहकर उनकी लड़ाई लड़ी, और जनता ने उसी भरोसे पर अपना जनादेश दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत 2026 के केरल विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, खासकर उस राज्य में जहां पार्टी अब तक सीमित मौजूदगी ही दर्ज करा पाई है। प्रदर्शन कर रहे परिवारों को उस वक्त बड़ी राहत मिली थी, जब केरल हाईकोर्ट ने मुनंबम की जमीन को वक्फ संपत्ति मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद ही लोगों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला बदलते हुए मतदान में हिस्सा लिया। हालांकि, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इससे साफ है कि कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।