कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच कांग्रेस नेताओं ने फिलहाल संयमित रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ मंत्री और नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री को लेकर कोई भी फैसला सिर्फ कांग्रेस हाईकमान ही करेगा और अभी तक उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि कांग्रेस नेता लगातार इसे सामान्य बैठक बता रहे हैं।
कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ मंत्री केएच मुनियप्पा ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल किसी को कुछ पता नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जो भी फैसला होगा, उसकी जानकारी मुख्यमंत्री और पार्टी हाईकमान ही देंगे।
मुनियप्पा ने कहा, “हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हम भी इंतजार कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री क्या निर्णय लेते हैं। मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक में ही स्पष्ट होगा कि शीर्ष नेतृत्व ने क्या फैसला किया है। हम सभी कांग्रेस पार्टी के अनुशासित और ईमानदार सिपाही हैं और हाईकमान के हर फैसले का स्वागत करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल जो चर्चाएं चल रही हैं, वे केवल अटकलें हैं। मुनियप्पा ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व की चर्चा केवल राज्यसभा और विधान परिषद सीटों को लेकर हुई थी। इससे आगे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
इस बीच मुनियप्पा ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने कहा कि नेहरू ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और बाद में देश के विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाओं तथा औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाया।
वहीं, कांग्रेस नेता वी.एस. उग्रप्पा ने भी मुख्यमंत्री को लेकर चल रही चर्चाओं को महज अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का सहयोगियों को नाश्ते पर बुलाना कोई नई बात नहीं है। अक्सर सरकार और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए ऐसी बैठकें होती रहती हैं।
उग्रप्पा ने कहा, “यह सामान्य बात है। मुख्यमंत्री पार्टी मामलों, विकास कार्यों और सरकारी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सहयोगियों को बुलाते रहते हैं। फिलहाल जो बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अफवाहें हैं। जब तक हाईकमान कोई आधिकारिक फैसला नहीं लेता, तब तक इस पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।”
उन्होंने भी केसी वेणुगोपाल के बयान का हवाला देते हुए कहा कि मीडिया के सामने स्पष्ट किया जा चुका है कि चर्चा केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर हुई थी।
हालांकि कांग्रेस नेता लगातार नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर कोई बड़ा फैसला ले सकता है।
फिलहाल, कांग्रेस के सभी नेता सार्वजनिक तौर पर यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि पार्टी में अनुशासन कायम है और अंतिम फैसला हाईकमान का ही होगा। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की बैठक और कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई है।