पीएम मोदी के पेपर लीक मामलों में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने संबंधी बयान पर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर युवाओं की चिंता इतनी ही थी, तो पहले क्यों नहीं सोचा गया? जब पेपर लीक हो रहे थे, तब सरकार चुप क्यों थी? 23 दिनों से अधिक समय तक बच्चे भूख हड़ताल पर बैठे रहे, लेकिन उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई। 2014 के बाद क्या कभी शिक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई? क्या संसद में शिक्षा के मुद्दे पर बात की गई या किसी भाषण में इसे प्राथमिकता दी गई? मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वे देश के भविष्य और युवाओं की शिक्षा को लेकर गंभीरता से सोचें।” आइए सबसे पहले आपको उनका बयान सुनाते है...