कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने राहुल गांधी पर कंगना रनौत के 'टपोरी' वाले बयान पर कहा, "जो यह बयान दिया गया है, वह कोई असंस्कृत व्यक्ति ही दे सकता है। इस तरह की भाषा राजनीति में इस्तेमाल नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी का अवलोकन किया है। किसने उन्हें राहुल गांधी का अवलोकन करने के लिए कहा है.राजनीति और फिल्मी दुनिया में बहुत अंतर है। राहुल गांधी बहुत अच्छे इंसान हैं.
राहुल गांधी पर कंगना रनौत के 'टपोरी' वाले बयान पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "भाजपा के अंदर एक अजीब होड़ चल रही है कि कौन अपनी बात कहने में सबसे नीचे गिर सकता है, कौन सबसे घटिया कमेंट कर सकता है, कौन सबसे बेतुके बयान दे सकता है... कंगना हमेशा से अजीब कमेंट करती रही हैं। अब जब वे इस रेस में शामिल हो गई हैं, तो वे पहले से भी ज़्यादा बकवास कर रही हैं। मैं उनके अतीत को नहीं खंगालना चाहती हूं लेकिन जिस तरह के बयान वे अभी दे रही हैं, उसे देखते हुए लगता है कि उन्हें मनोचिकित्सक की सख्त ज़रूरत है, क्योंकि उनकी हालत लाइलाज होती जा रही है।"
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच तीखा शब्दों का इस्तेमाल देखने को मिला, जब अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे “टपोरी की तरह व्यवहार करते हैं” और उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से सीखना चाहिए। कंगना रनौत का यह बयान राजनीतिक माहौल में चल रही तीखी बहस का हिस्सा माना जा रहा है, जहां विभिन्न दलों के नेता एक-दूसरे पर व्यक्तिगत और राजनीतिक टिप्पणियां करने से नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के व्यवहार और सार्वजनिक प्रस्तुति को अपेक्षाकृत अधिक संयमित बताते हुए राहुल गांधी की शैली पर सवाल उठाए।
इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों और नेताओं ने कंगना के बयान की आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक और व्यक्तिगत हमला बताया, जबकि भाजपा समर्थकों के बीच इसे एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि राहुल गांधी हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं, जिससे सियासी माहौल पहले से ही गरम है। ऐसे में कंगना रनौत का यह बयान इस बहस को और तेज करने वाला साबित हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लोकतांत्रिक संवाद के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं और मूल मुद्दों से ध्यान भटका सकते हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां समर्थक और विरोधी अपने-अपने नजरिए से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।