झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और CBI जांच की मांग को लेकर छात्रों का सत्याग्रह आंदोलन लगातार जारी है। शुक्रवार को आंदोलन के 14वें दिन सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। रांची स्थित राजकीय अतिथिशाला में करीब दो घंटे तक चली इस वार्ता में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राज्य सरकार की ओर से चार मंत्रियों ने हिस्सा लिया, जबकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखी। हालांकि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग—भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक की CBI जांच—पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। इसके बाद छात्रों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी इस प्रमुख मांग पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका सत्याग्रह आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राजेश प्रसाद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार के साथ चर्चा बेहद सकारात्मक माहौल में हुई। उनके अनुसार बातचीत ऐसा महसूस करा रही थी जैसे परिवार के लोगों के बीच संवाद हो रहा हो। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रियों के सामने अपनी सभी मांगों को तथ्यों और प्रमाणों के साथ विस्तार से रखा। छात्रों ने यह भी समझाया कि उनकी मांगें केवल भावनात्मक नहीं बल्कि पूरी तरह न्यायसंगत और ठोस आधार पर आधारित हैं। राजेश प्रसाद ने कहा कि मंत्रियों ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और स्वीकार किया कि छात्रों की मांगें उचित हैं। उन्होंने विशेष रूप से CGL परीक्षा और JPSC से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा रद्द करने की मांग भी पूरी तरह जायज़ है।
राजेश प्रसाद ने आगे कहा कि मंत्रियों ने यह भी माना कि पहले छात्रों की मांगों और उनके पीछे मौजूद तथ्यों की पूरी जानकारी उन्हें नहीं थी। इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सभी मुद्दों को विस्तार से रखा, जिसके बाद मंत्रियों को वास्तविक स्थिति का पता चला। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों की हर मांग और उससे जुड़े तथ्यों को पूरी संवेदनशीलता के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री संवेदनशील हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। हालांकि, जब तक CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।