राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग की छत अचानक गिर गई, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। प्रार्थना सभा के दौरान हुई इस घटना में करीब 20 से अधिक बच्चे मलबे में दबे होने का अनुमान है। वहीं सात बच्चों के मौत की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल का भवन काफी पुराना था और बारिश के दौरान पहले भी पानी टपकने की शिकायतें की जा चुकी थीं। कई बार शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई सुध नहीं ली। यह हादसा सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रदेश में पहले भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं।सूचना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और मलबे में दबे हुए बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया।
घटना के बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे हैं। एकजुट होकर सभी मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोग कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी से जल्दी बच्चों को निकाला जा सके।झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में यह हादसा सामने आया है। सामने आया है कि स्कूल की छत काफी समय से जर्जर हो रही थी और लगातार हो रही भारी बारिश के बाद छत के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ था। गंभीर घायल बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। मलबा हटाने में रेस्क्यू टीम के साथ ग्रामीण भी पूरी तरह से लगे हुए हैं। यह स्कूल से पीपलोद गांव में बना हुआ था। जानकारी में यह भी सामने है कि मलबे में दबे सभी बच्चे 7वीं कक्षा के थे। जिस समय हादसा हुआ उसमें बच्चे अपने कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।घटना पर दुख जताते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, "झालावाड़ के मनोहरथाना में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने की खबर आ रही है, जिसमें कई बच्चे और शिक्षक हताहत हुए हैं। मैं ईश्वर से कम से कम जनहानि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।"हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिवंगत दिव्य आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने हादसे की जांच के निर्देश भी दिए हैं।
पीपलोदी, मनोहरथाना के स्कूल भवन में हुआ हादसा अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है। जनहानि और कई बच्चों के घायल होने का समाचार हृदयविदारक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत मासूम आत्माओं को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती हूं।
घटना पर दुख जताते हुए डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधा। सिस्टम की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मासूमों की जान सिर्फ लापरवाही की वजह से गई है। मां-बाप से बहुत सपने देखकर बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए स्कूल भेजा होगा लेकिन सरकारी तंत्र इतना लापरवाह हो गया कि यही संज्ञान नहीं ले सका कि ये भवन बच्चों के सुरक्षित है कि नहीं। हमें इस घटना से सीख लेकर जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए। हमें उन विद्यायल जो जर्जर हैं, बच्चों के सुरक्षित नहीं हैं, वहां से बच्चों को दूसरी जगह बच्चों को शिफ्ट करना चाहिए। जब तक वहां नया भवन न बने या मरम्मत न हो जाए तब तक बच्चों को शिक्षा कहीं और सुचारू रूप से कराई जानी चाहिए।