पिछले तीन हफ्तों से ईरान में जो हो रहा है, वो अब सिर्फ एक विद्रोह नहीं रहा, बल्कि एक ग्लोबल जंग की आहट बन चुका है। पिछले तीन हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने न केवल देश की आंतरिक नींव को हिला कर रख दी है, बल्कि दुनिया की महाशक्तियों को भी आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है। इधर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे Middle East में युद्ध की आहट पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और ईरान की जवाबी चेतावनी ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। तेहरान से लेकर मशहद तक, हजारों लोग सड़कों पर हैं। लेकिन इसकी कीमत बहुत भारी है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 538 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सरकार ने इंटरनेट काट दिया है ताकि दुनिया को पता न चले कि अंदर क्या हो रहा है।" यानि डिजिटल ब्लैकऔट किया गया लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एंट्री हो गई।
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान ने 'रेड लाइन' पार कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा 'हमारी सेना तैयार है और हमारे पास बहुत सख्त विकल्प हैं। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान शायद उस 'रेड लाइन' को पार कर चुका है, जो उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हत्या को लेकर तय की थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सीमा लांघी जा चुकी है, तो ट्रंप ने कहा ऐसा लगता है कि वे उस दिशा में बढ़ चुके हैं। ट्रंप ने ईरान की सत्ता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कई ऐसे लोग मारे गए हैं जिन्हें नहीं मारा जाना चाहिए था। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे असल में नेता हैं या सिर्फ हिंसा के दम पर शासन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा हम और हमारी सेना इस स्थिति को बहुत गंभीरता से देख रहे हैं। हमारे सामने कई बेहद सख्त विकल्प हैं और हम जल्द ही कोई फैसला करेंगे। इतना ही नहीं, इस बीच ट्रंप ने एक और बड़ा कार्ड खेला है वो Starlink है। ईरान को स्टारलिंक इंटरनेट भेजे जाने के सवाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस बारे में बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा हम इस पर चर्चा करेंगे। हो सकता है कि इंटरनेट चालू किया जाए। हम एलन मस्क से भी बात कर सकते हैं, मैं उन्हें फोन करने वाला हूं। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान की सरकार का 'इंटरनेट सेंसरशिप' का किला ढह जाएगा।"