रेपो दर में कटौती के बाद बैंक भी कर्ज सस्ता कर सकते हैं। इससे लोगों की होम और कार लोन समेत विभिन्न कर्जों की मासिक किस्त घट जाएगी। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि खाद्य कीमतों में गिरावट आने से आरबीआई पर आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए नीतिगत दरों में ढील देने का दबाव बढ़ेगा।