एआईएमआईएम प्रमुख असुदद्दीन ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम द्वारा 15 अगस्त पर बूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद करने के आदेश की कड़ी निंदा की है। ओवैसी ने एक्स पर एक पोस्ट में तर्क दिया कि इस तरह के प्रतिबंध निर्दयी और असंवैधानिक हैं। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को मांसाहार से जोड़ने के औचित्य पर सवाल उठाया। ओवैसी ने दावा किया है कि तेलंगाना की 99 प्रतिशत आबादी अपने आहार में मांस शामिल करती है। गौरतलब हो कि महाराष्ट्र में कल्याण, नागपुर, औरंगाबाद और मालेगांव में स्थानीय निकायों ने भी ऐसे ही आदेश जारी किए हैं। ओवैसी ने हैदराबाद समेत सभी निगमों के फैसले की आलोचना की है।
ओवैसी ने कहा यह एक असंवैधानिक आदेश है। यह स्वतंत्रता दिवस है, एक खुशी का अवसर है। हमारे बुजुर्गों ने आजादी की लड़ाई में बहुत कुछ कुर्बान किया है...इस तरह का आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए था. कोई शराब पीकर कुछ गलत काम कर सकता है लेकिन मांस बेचना व्यक्ति की आजीविका है वहीं मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर कहा, "हमने महात्मा गांधी को अपना आदर्श माना है और वो हमेशा अहिंसा की बात करते थे और इसलिए जब हम 15 अगस्त, 26 जनवरी मनाते हैं, तो महात्मा गांधी के प्रति भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके सम्मान में अगर एक दिन मांस की दुकानें बंद रहें, तो इसमें क्या आपत्ति हो सकती है?..."
ओवैसी ने कहा है कि उन्होंने आगे तर्क दिया कि ये मांस प्रतिबंध मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। यह मांस प्रतिबंध लोगों के स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम और दूसरे निकायों से फैसलों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मांस व्यापार पर निर्भर लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को उजागर किया है। ओवैसी ने देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।