भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद के बयान पर कहा, "किसी भी जिहादी के बारे में और भटके हुए इंसान के बारे में निश्चित रूप से उसके प्रति सहानभूति नहीं होनी चाहिए। अगर इस बार का बयान एक सांसद द्वारा दिया गया है तो मैं समझता हूं सकारात्मक सोच है। लेकिन कांग्रेस की सोच सकारात्मक नहीं है.आतंकवादियों का मुकादम कपिल सिब्बल जैसे कांग्रेस के सांसद लड़ते थे। तो ये सोच को पूरी पार्टी की सोच बनानी होगी आपके बयान देने से कुछ नहीं होता। पूरी पार्टी को आतंकवादी के खिलाफ सोच रखनी चाहिए। आज आतंकवादियों के खिलाफ कोई बात होती है तो महबूबा मुफ्ती की आवाज नहीं निकलती। फारुख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्लाह की आवाज नहीं निकलती.ममता बनर्जी वोट के लालच में इस तरह के जिहादी मंतव्यों का उल्लंघन नहीं करती हैं.सभी दलों से अनुरोध है कि आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए और आतंकवाद करने वालों के प्रति सहानभूति भी नहीं होनी चाहिए। जिहादी सोच वाले लोग भारत के नहीं हो सकते हैं.अगर आतंकवाद करेंगे और सोच रखेंगे तो ऐसा दंड मिलेगा कि दुनिया याद रखेगी
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट के मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी को "भटका हुआ युवा" बताकर एक बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
मसूद ने यह प्रतिक्रिया उमर उन नबी के एक वीडियो सामने आने के बाद दी है, जिसमें वह आत्मघाती हमले को जायज ठहराता नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस वीडियो से असहमत हैं और यह इस्लाम की सही तस्वीर पेश नहीं करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्महत्या किसी भी सूरत में इस्लाम में स्वीकार्य नहीं है और यह हराम है। मसूद के अनुसार, "आप मासूम लोगों को मार रहे हैं, यह इस्लाम नहीं सिखाता। ये भटके हुए लोग हैं और इनसे इस्लाम की तस्वीर पेश नहीं होती, न ही ये इस्लाम का रास्ता है।" उन्होंने आगे कहा कि उनका धर्म उन्हें अपने देश से प्यार करना सिखाता है, और ऐसे कृत्य करने वाला व्यक्ति देश के खिलाफ है।
इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी आपत्ति जताई है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मसूद के बयान को "आतंकवाद को संरक्षण देने वाला" करार दिया है और कहा है कि कांग्रेस का "असली चेहरा" बेनकाब हुआ है। उन्होंने इमरान मसूद पर "आतंक के स्पिन डॉक्टर" की तरह काम करने का आरोप लगाया और कहा कि यह विपक्षी दलों की "वोट बैंक नीति को राष्ट्र नीति से ऊपर" रखने की पुरानी रणनीति का हिस्सा है।
इससे पहले, इमरान मसूद फिलिस्तीनी militant समूह हमास की तुलना स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह से करने को लेकर भी विवादों में आ चुके हैं, हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी थी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। उनका कहना था कि दोनों अपनी जमीन के लिए लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया था कि भगत सिंह के साथ किसी की तुलना नहीं की जा सकती।