ईस्ट बंगाल ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेले गए डूरंड कप फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 से हराकर ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने 22 साल से चले आ रहे डूरंड कप ट्रॉफी के इंतजार को खत्म किया और रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए अपना 17वां डूरंड कप खिताब जीता। अब ईस्ट बंगाल और मोहन बागान दोनों के नाम इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के 17-17 खिताब हैं। ईस्ट बंगाल ने इससे पहले 2004 में मोहन बागान को ही 2-1 से हराकर डूरंड कप जीता था।
फाइनल में ईस्ट बंगाल की जीत के सबसे बड़े नायक एडमंड लालरिंडिका रहे, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाकर मुकाबले को लगभग पहले हाफ में ही अपनी टीम के पक्ष में कर दिया। एंटोनियो लोपेज हबास के मार्गदर्शन में खेल रही ईस्ट बंगाल ने शुरुआत से ही बेहद आक्रामक और संगठित फुटबॉल का प्रदर्शन किया। कप्तान मोहम्मद राशिद ने मिडफील्ड में बेहतरीन नियंत्रण रखा और टीम के हमलों को दिशा दी। 10वें मिनट में राशिद ने शानदार तरीके से गेंद बिपिन सिंह तक पहुंचाई, जिन्होंने गोल करके ईस्ट बंगाल को 1-0 की बढ़त दिला दी।
इसके सिर्फ दो मिनट बाद लालरिंडिका ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता का प्रदर्शन करते हुए गोल दाग दिया और ईस्ट बंगाल की बढ़त 2-0 हो गई। 22वें मिनट के आसपास उन्होंने एक और शानदार मौका भुनाकर अपना दूसरा गोल पूरा किया। इस गोल में हार्दिक भट्ट और डैनियल रामिरेज की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ईस्ट बंगाल लगातार मोहन बागान की रक्षापंक्ति पर दबाव बना रहा था और उसके तेज आक्रमणों के सामने विपक्षी टीम असहज नजर आई।
मोहन बागान ने 33वें मिनट में मनवीर सिंह के गोल से वापसी की उम्मीद जगाई और स्कोर 3-1 किया, लेकिन ईस्ट बंगाल ने दबाव कम नहीं होने दिया। पहले हाफ के 44वें मिनट में राशिद की मदद से लालरिंडिका ने अपना तीसरा गोल दागते हुए हैट्रिक पूरी की। इसके साथ ही स्कोर 4-1 हो गया और ईस्ट बंगाल ने मैच पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया।
दूसरे हाफ में मोहन बागान ने वापसी की कोशिश की, लेकिन ईस्ट बंगाल की रक्षापंक्ति और अनुशासित रणनीति के सामने उसे सफलता नहीं मिली। हबास की टीम ने अपनी बढ़त को सुरक्षित रखते हुए मुकाबला समाप्त किया। यह जीत 2023 के डूरंड कप फाइनल की हार का बदला भी मानी जा रही है, जब मोहन बागान ने ईस्ट बंगाल को 1-0 से हराया था।
एडमंड लालरिंडिका की हैट्रिक ने उन्हें इस फाइनल का सबसे चमकदार सितारा बना दिया। उनकी शानदार फिनिशिंग, ईस्ट बंगाल की तेज शुरुआत और पूरे मुकाबले में टीम के अनुशासन ने मिलकर लाल-पीली टीम को एक यादगार जीत दिलाई। 22 साल बाद डूरंड कप ट्रॉफी उठाना ईस्ट बंगाल के लिए केवल एक खिताबी जीत नहीं, बल्कि क्लब के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय है।