गोविंदानंद सरस्वती जी महाराज कहते हैं, "हम अयोध्या में भी दीपोत्सव मना रहे हैं। भगवान राम की कृपा से यह परंपरा वहाँ भी विद्यमान है, लेकिन इसे हमारे जैसे जम्मू-कश्मीर जैसे स्थान पर पुनः स्थापित किया जा रहा है। बहुत से लोग भूल गए हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर देवभूमि है। यह हिमालय में स्थित देवी दुर्गा का जन्मस्थान है, देवी पार्वती का निवास है। यह देवी शारदा का निवास स्थान है। यह देवी वैष्णवी का निवास स्थान है। जिस प्रकार अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जा रहा है, उसी प्रकार यह ईश्वर की कृपा है कि हम जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर भी दीपोत्सव मना रहे हैं। इस दिवाली के पावन अवसर पर, हम देशवासियों और कश्मीर के सभी लोगों को ढेर सारी शुभकामनाएँ दे रहे हैं.जहाँ गोलियाँ चलाई जाती थीं, वहाँ अब भक्ति के फूल खिल रहे हैं.यह दिवाली का त्योहार सभी के दिलों के सारे डर और दर्द को दूर कर देगा।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में स्थित ऐतिहासिक लाल चौक (Lal Chowk) पर दिवाली का उत्सव अब एक भव्य और महत्वपूर्ण आयोजन बन गया है। यह हाल के वर्षों में शुरू हुई एक परम्परा है, जिसे 'नये कश्मीर' में शांति और सामान्य स्थिति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। लाल चौक पर दिवाली का जश्न बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग, पर्यटक और सुरक्षा बल एक साथ शामिल होते हैं। प्रमुख गतिविधियों में शामिल हैं:
उत्सव का मुख्य आकर्षण हजारों दीयों (मिट्टी के लैंप) को जलाना है। 2024 में, पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हुए आयोजन में 10,000 से अधिक दीये जलाए गए थे। लाल चौक के प्रतिष्ठित घंटा घर (Clock Tower) और आसपास की इमारतों को रंग-बिरंगी रोशनियों से भव्य रूप से सजाया जाता है, जो एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। उत्सव के दौरान शानदार आतिशबाजी की जाती है, जो माहौल को और भी जीवंत बना देती है।
इन समारोहों में लोक नृत्य और संगीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रदर्शन भी शामिल होते हैं। उत्सव के हिस्से के रूप में सार्वजनिक रूप से पूजा और प्रार्थनाएं भी आयोजित की जाती हैं, जैसे 2024 में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया था। इन समारोहों की खास बात यह है कि इसमें पर्यटक और स्थानीय कश्मीरी, सभी समुदायों के लोग, एक साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और जश्न में डूब जाते हैं।