फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi Old Vehicle Ban:दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर इन 10 नियमों में सुधार, सरकार के लिए सबसे जरूरी!

Sat, 05 Jul 2025 08:15 PM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10-15 साल पुरानी कार चलाने वालों के लिए गुड न्यूज सामने आई है। CM रेखा गुप्ता की सरकार ने पुरानी कार वालों को राहत देते हुए इन पर बैन लगाने का फैसला वापस ले लिया है। पेट्रोल पंपों पर अब पुरानी कार को भी ईंधन मिलेगा। पेट्रोल पंपों पर अब पुरानी कार सीज नहीं होंगी। अब उम्र के आधार पर कारों पर बैन नहीं लगेगा। आपको बता दें कि गाड़ियों पर बैन लगाने और उन्हें पंपों पर ईंधन न देने के फैसले को लेकर कई लोग नाराजगी जाहिर कर रहे थे। पुरानी कार को लेकर फैसले पर दिल्ली सरकार ने U टर्न ले लिया है। दिल्ली में अब पुरानी कार बेकार नहीं होगी बल्कि वो दौड़ेगी क्योंकि रेखा गुप्ता सरकार ने 1 जुलाई से लागू फैसलों को वापस ले लिया है। यानी अब पेट्रोल पंपों पर 10 साल पुरानी डीजल कार और 15 साल पुरानी पेट्रोल कार को भी ईंधन मिलेगा। साथ ही दिल्ली सरकार ने इस बात का भी फैसला लिया है कि पेट्रोल पंपों पर अब पुरानी गाड़ियों को सीज नहीं किया जाएगा। लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं वो दस सुधार जिसको अगर सरकार नियम बनाते समय सुधार कर लेती तो न जनता को समस्या होती और न ही सरकार के फैसले का विरोध होता...

असल में प्रदूषण गाड़ी की उम्र से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि गाड़ी की देखभाल कैसे की जा रही है, उसे कैसे चलाया जा रहा है और उसके प्रदूषण कंट्रोल सिस्टम कैसे काम कर रहे हैं। एक अच्छी तरह से रखी गई 10 साल पुरानी गाड़ी भी एक नई डीजल गाड़ी से कम प्रदूषण कर सकती है अगर उस नई गाड़ी का DPF (डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर) या सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। DPF एक फिल्टर होता है जो डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को साफ करता है। सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जो डीजल गाड़ियों से निकलने वाली हानिकारक गैसों को कम करता है।

एक ही उम्र की गाड़ियों में भी प्रदूषण का स्तर अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक 10 साल पुरानी BS-3 डीज़ल गाड़ी जो कम चलती है और जिसकी सर्विसिंग नियमित रूप से होती है, वो एक 2 साल पुरानी BS-4 टैक्सी से कम प्रदूषण कर सकती है। BS-3 और BS-4 भारत में प्रदूषण के मानक हैं। अगर एक 10 साल पुरानी गाड़ी फिटनेस और प्रदूषण टेस्ट पास कर लेती है और फिर भी उसे स्क्रैप कर दिया जाता है, तो इससे कार्बन का नुकसान होता है। कार्बन का नुकसान इसलिए होता है क्योंकि गाड़ी को बनाने में भी प्रदूषण होता है। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा नहीं मिलता है। सर्कुलर इकोनॉमी एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसमें चीजों को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है और कचरा कम किया जाता है। उम्र के आधार पर रोक लगाने से उन लोगों को नुकसान होता है जो अपनी गाड़ी कम चलाते हैं (3,000-5,000 किमी/वर्ष) और अपनी गाड़ी की देखभाल अच्छी तरह से करते हैं। वहीं, उन गाड़ियों पर ध्यान नहीं दिया जाता जो ज्यादा चलती हैं और जिनकी देखभाल ठीक से नहीं होती है।

 

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें