दिल्ली की जहरीली हवा के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा है, साथ ही दिल्ली की सरकार से भी जवाबदेही मांगी है। उनकी मुख्य मांगें और चिंताएं इस प्रकार हैं: राहुल गांधी ने जोर देकर कहा है कि भारत को वायु प्रदूषण पर संसद में तत्काल, विस्तृत बहस की आवश्यकता है, ताकि इस 'स्वास्थ्य आपातकाल' से निपटा जा सके।
उन्होंने सरकार से केवल बहाने बनाने या ध्यान भटकाने के बजाय, इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए एक सख्त और लागू करने योग्य (enforceable) कार्य योजना लाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि साफ हवा हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है और उनके बच्चे स्वच्छ हवा के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि "वे थके हुए, डरे हुए और गुस्से में हैं।"उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब बच्चे और बुजुर्ग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, तब सरकार कोई तत्परता, योजना या जवाबदेही क्यों नहीं दिखा रही है।
उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि साल दर साल हवा जहरीली होती जा रही है, लेकिन सरकारें सिर्फ बहाने बदलती हैं। अब जनता को सरकारों के बहाने नहीं, बल्कि साफ हवा चाहिए। उन्होंने प्रदूषण को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को हिरासत में लेने की भी आलोचना की और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण एक गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य संकट बन गया है, खासकर सर्दी की शुरुआत के साथ हालात और भी बदतर हो जाते हैं। नवंबर के महीने में अक्सर दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' (301-400) से लेकर 'गंभीर' (401+) श्रेणी तक पहुँच जाता है। हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे बारीक कणों का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक दर्ज होता है, जिससे हर साँस लेना स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है। इन प्रदूषकों का उच्च स्तर फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देता है, और एक सर्वे के अनुसार 80% से अधिक निवासी लगातार स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे कि पुरानी खांसी और आँखों में जलन, का सामना कर रहे हैं।
प्रदूषण के मुख्य कारणों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना (हालांकि इसका योगदान मौसम के साथ बदलता रहता है), वाहनों का उत्सर्जन (जो प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा है), निर्माण गतिविधियों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और खराब मौसम संबंधी परिस्थितियाँ शामिल हैं। ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक तत्व हवा की निचली परतों में फँस जाते हैं, जिससे स्मॉग (धुंध और धुएँ का मिश्रण) की मोटी परत छा जाती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सरकार और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत विभिन्न चरणों में प्रतिबंध लागू किए जाते हैं, जिनमें निर्माण कार्यों पर रोक, सड़कों पर पानी का छिड़काव और निजी/सरकारी कार्यालयों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश शामिल हैं। इसके बावजूद, हवा की गुणवत्ता में अस्थिरता बनी रहती है और लोगों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की हिदायत दी जाती है। यह प्रदूषण संकट दिल्ली के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है, और कुछ रिपोर्टों के अनुसार लोग इस जहरीली हवा से बचने के लिए अन्य शहरों में पलायन करने पर भी विचार कर रहे हैं।