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Controversy Over Tejashwi's Statement: वक्फ बिल पर घिर गए तेजस्वी NDA के नेताओं ने लगी दी क्लास!

Mon, 30 Jun 2025 11:30 PM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

राजद नेता तेजस्वी यादव के एक बयान ने बिहार से दिल्ली तक सियासी हलचल बढ़ा दी है. पटना के गांधी मैदान में राजद नेता तेजस्वी यादव ने वक्फ कानून को “कूड़ेदान में फेंकने” की बात कही थी. भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इस बयान को संसद और संविधान का अपमान बताते हुए INDI गठबंधन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि क्या महागठबंधन बिहार में शरिया कानून जैसा सिस्टम लागू करना चाहता है.
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पटना के उसी गांधी मैदान में जहां आपातकाल के समय लाखों लोगों ने संविधान की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी, वहीं अब तेजस्वी यादव जैसे नेता कह रहे हैं कि संसद से पारित कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे.” उन्होंने इसे संसद और न्यायपालिका दोनों का अपमान बताया
त्रिवेदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या INDI गठबंधन बिहार में सऊदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्की या फिर ISIS से बड़ा शरिया कानून लागू करना चाहता है? यह सोच बेहद खतरनाक है. हमें इस पर स्पष्ट जवाब चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और NDA इस बात के लिए संकल्पित है कि संविधान को कोई ठेस न पहुंचे और कोई भी उसे ‘कूड़ेदान’ में नहीं फेंक सकेगा.
दरअसल तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में कहा था कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने साफ कर दिया है कि वक्फ कानून मुस्लिम समाज की संपत्ति पर हमला है. हमने संसद में इसका विरोध किया, और अब अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है. तेजस्वी ने दावा किया कि यह कानून अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का षड्यंत्र है.
तेजस्वी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा, “बीजेपी की मदद के लिए आयोग मतदाता सूची में छेड़छाड़ कर रहा है. हमें सतर्क रहना होगा और लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करने की हर साजिश को नाकाम करना होगा.”
बता दें तेजस्वी के बयान और भाजपा के जवाबी हमले ने बिहार की सियासत को गर्मा दिया है. वक्फ अधिनियम अब केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. दोनों पक्ष इसे अपने-अपने वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा अब आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है. जहां महागठबंधन इसे अल्पसंख्यक अधिकारों का सवाल बता रहा है, वहीं भाजपा इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ रही है.


 

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