नई दिल्ली में छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले और विपक्षी नेताओं की हिरासत के विरोध में कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन किए। इसी क्रम में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में भोपाल स्थित राजभवन के बाहर भी बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने नई दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे विद्यार्थियों के साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने को भी लोकतंत्र पर हमला बताया।
इस दौरान जीतू पटवारी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामले के कारण अनेक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और लगभग 20 छात्रों ने कथित रूप से आत्महत्या जैसा कदम उठाया, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने के बजाय आवाज उठाने वालों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हितों की बात करने वालों को भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री ने देशद्रोही तक कह दिया, जबकि वास्तविक दोषी वे लोग हैं जिन्होंने पेपर लीक किया और उसे संरक्षण दिया। पटवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जब तक वे छात्रों से माफी नहीं मांगते और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते, तब तक कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में पूरी रात धरना देने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जीतू पटवारी को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद भी उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की जगह तानाशाही का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लिया जा रहा, छात्रों पर अत्याचार हो रहा है, राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया, जबकि छात्रों की आवाज को भी बलपूर्वक दबाया गया। पटवारी ने कहा कि पेपर लीक के कारण देश के युवाओं का भविष्य संकट में है, कई छात्रों ने कथित रूप से आत्महत्या की, फिर भी सरकार जवाबदेही तय करने को तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर बड़े पेपर लीक मामले में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम क्यों सामने आते हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगी।