कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट संगठन सृजन अभियान अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। पार्टी ने नवंबर के पहले सप्ताह तक राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में सभी जिलाध्यक्ष बदलने की योजना बनाई है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता की भूमिका बेहद सीमित कर दी गई है।
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की मौजूदगी में दिल्ली में पर्यवेक्षकों की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि दशहरे के बाद पर्यवेक्षक जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद छह नामों का पैनल बनाकर आलाकमान को सौंपेंगे।
अभियान के तहत अब तक 274 जिलों में संगठन सृजन कार्य पूरा हुआ है और 144 जिलाध्यक्ष घोषित किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि नई नियुक्तियों में प्रतिनिधित्व संतुलित किया गया है-
• ओबीसी: 24% से बढ़कर 33%
• एससी: 4% से बढ़कर 12%
• एसटी: 6% से बढ़कर 12%
• अल्पसंख्यक: 5% से बढ़कर 9%
• 50 साल से कम उम्र के अध्यक्ष: 51%
कांग्रेस की योजना है कि 2026 तक सभी राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। जिला व शहर अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जिनमें कांग्रेस विचारधारा, बूथ प्रबंधन, डिजिटल टूल्स और फंड रेजिंग जैसे विषय शामिल हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का कहना है, “यह अब तक का सबसे प्रभावशाली अभियान है। इससे पार्टी में गुटबाजी खत्म हो रही है और जमीनी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व का अवसर मिल रहा है।”