अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने कहा, "सभी को छठ पूजा की शुभकामनाएं.हम बिहारियों के लिए छठ पूजा बहुत बड़ा भाव है.छठ पूजा हमें सिखाती है कि हम एक समान रूप से लोगों को देखें, समझें और एक दूसरे को जोड़कर चलें। मुझे लगता है कि पूरे साल ही हमें एक दूसरे के साथ रहना चाहिए और किसी से द्वेष, छल नहीं करना चाहिए
अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने छठ पर्व को लेकर अपनी गहरी आस्था और बचपन की यादों को साझा किया है। उन्होंने छठ को सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि अपनी 'मिट्टी, बचपन और माँ' से जुड़ा एक भावनात्मक रिश्ता बताया है। अक्षरा सिंह हर साल इस महापर्व को पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर नहाय-खाय से लेकर खरना तक की झलकियाँ साझा की हैं और कहा है कि 'पवित्रता का पहला पड़ाव, नहाय-खाय से शुरू हुआ आस्था का प्रवाह।' उन्होंने नहाय-खाय के महत्व को बताते हुए कहा कि इस दिन व्रती मां छठी और सूर्य देव से आशीर्वाद मांगती हैं कि वे आने वाले चार दिनों तक नियम, भक्ति और शुद्धता बनाए रखें, और यह आस्था का क्षण है जहाँ हर व्रती अपने जीवन की नकारात्मकता को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करती है।
इसके अलावा, अक्षरा सिंह ने एक बचपन की याद भी साझा की है, जब लगभग पाँच साल की उम्र में उन्होंने शारदा सिन्हा के एक छठ गीत पर मजाक किया था, जिस पर उनकी माँ ने उन्हें कलछुल से पीटा था। यह घटना दर्शाती है कि उनके परिवार में इस पर्व की शुचिता और महत्व कितना गहरा रहा है। अक्षरा ने खुद भी अविवाहित होते हुए छठ व्रत शुरू किया और इस पर उठने वाले सवालों पर कहा कि अगर लड़के छठ कर सकते हैं, तो कुँवारी लड़कियाँ क्यों नहीं? उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान उन्हें ज़रा भी थकान महसूस नहीं हुई, जो उनके लिए एक चमत्कारी अनुभव था, और उन्हें लगा कि छठ माँ घर आ चुकी हैं और वही उनसे यह सब करा रही हैं। वे हर साल छठ गीत भी गाती हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय होते हैं और पर्व के माहौल को भक्तिमय बनाते हैं।