छठ माता की उपासना का महापर्व शुरू हो चुका है। यानि की खरना का आज दिन है। आज छठ पूजा का दूसरा दिन है, जिसे खरना कहा जाता है, खबरों की मानें तो चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और दूसरे दिन खरना पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है. यह दिन छठ महापर्व की सबसे पवित्र और अनुशासित रस्मों में से एक माना जाता. जबकि इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद खरना का प्रसाद ग्रहण करके 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ करते हैं। खबरों की मानें तो नहाय-खाय के बाद दूसरे दिन यानी आज कार्तिक मास के शक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना का महत्व है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत करते हैं और एक समय का भोजन करते हैं। खरना व्रत में व्रती बिना नमक का खाना खाते हैं। खरना प्रसाद ग्रहण करने के बाद से 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस बीच साफ सफाई का काफी ध्यान रखा जाता है खासकर बर्तन तक पर सख्त नियम लागू होते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सूर्योदय सुबह 6 बजकर कुछ मिनट पर शुरु हुआ और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा। जबकि खरना पूजा और प्रसाद अर्पण शाम 5:41 के बाद होगा। आपको बता दे की खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर, बिना नमक के गेंहू की रोटी, और सात्विक फल जैसे केला, सेब, नारियल आदि शामिल होते हैं। यह प्रसाद पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होता है, जिसमें लहसुन, प्याज, मसाले या पैकेज्ड सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाता। खरना का प्रसाद बनाकर उसे सूर्य देव व छठी मैया को अर्पित किया जाता है। उसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं, जिससे 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।