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CBSE Student Vedant Viral: केसी वेणुगोपाल ने CBSE के OSM सिस्टम पर उठाए सवाल, पीएम को लिखा पत्र

Tue, 26 May 2026 09:35 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

देशभर में सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। संसद की लोक लेखा समिति यानी PAC के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता के. सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है कि इस नई व्यवस्था में सामने आई कथित गड़बड़ियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

दरअसल, CBSE ने इस बार बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। इस प्रणाली में परीक्षकों को छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल स्क्रीन पर दिखाई जाती हैं और वहीं अंक दिए जाते हैं। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज होगी। लेकिन अब इसी सिस्टम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

के. सी. वेणुगोपाल ने अपने पत्र में कहा कि कई छात्रों और अभिभावकों ने रिजल्ट में भारी गड़बड़ियों की शिकायत की है। उनका कहना है कि छात्रों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश और भविष्य के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा परिणामों से नाराज कई छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं। यह सिर्फ रिजल्ट का मामला नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

पत्र में पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। वेणुगोपाल ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगने की अंतिम तिथि आधी रात को समाप्त हो चुकी है, जबकि पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 29 मई के करीब है। ऐसे में छात्रों के पास अपनी कॉपियां देखने और समय रहते जरूरी कदम उठाने के लिए बहुत कम समय बचता है।

इस स्थिति ने छात्रों और अभिभावकों में भारी तनाव पैदा कर दिया है। कई छात्रों का कहना है कि अगर समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो वे कॉलेज एडमिशन और आगे की पढ़ाई के अवसर खो सकते हैं।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि एक प्रणालीगत विफलता का बोझ छात्रों पर डाला जा रहा है। छात्रों को आर्थिक, शैक्षणिक और मानसिक दबाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह किसी भी छात्र के साथ अन्याय है और सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और छात्रों को राहत देने के लिए समयबद्ध समाधान लागू करे। उनका कहना है कि कोई भी छात्र सिर्फ तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की वजह से अपने करियर के अवसरों से वंचित नहीं होना चाहिए।

इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष सरकार और CBSE से जवाब मांग रहा है, जबकि छात्र और अभिभावक पारदर्शी जांच और जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार और CBSE इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि यह मामला सिर्फ नंबरों का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य, भरोसे और मानसिक स्थिति से जुड़ा हुआ है।

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