देश के सबसे अमीर नगर निगम, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर की कुर्सी को लेकर बड़ा सियासी फैसला हो गया है। गुरुवार, 22 जनवरी को लॉटरी सिस्टम के जरिए यह तय हो गया कि इस बार बीएमसी की मेयर की कुर्सी पर एक महिला बैठेगी। लॉटरी ड्रॉ के जरिए तय हुए आरक्षण में बीएमसी के लिए ‘ओपन कैटेगरी महिला’ का कोटा सामने आया है। यानी अगला मेयर महिला होगी, लेकिन किसी भी जाति वर्ग से हो सकती है। इस फैसले के बाद मुंबई की सियासत में हलचल तेज हो गई है और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह महिला कौन होगी और किस पार्टी से होगी जो मुंबई की सत्ता की कमान संभालेगी।
आरक्षण तय होते ही जिस महिला नगरसेवक का नाम सबसे आगे चल रहा है, वह हैं बीजेपी की तेजस्वी घोसालकर। वार्ड नंबर 2 से जीत हासिल करने वाली तेजस्वी घोसालकर को मेयर पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। तेजस्वी पहले उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना में थीं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था और इसके बाद चुनाव जीतकर बीएमसी पहुंचीं। वह पूर्व पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं, जिनकी फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वजह से तेजस्वी का नाम राजनीतिक और भावनात्मक दोनों ही दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
तेजस्वी घोसालकर का सियासी सफर भी चर्चा में है। उन्होंने इस बार उद्धव ठाकरे गुट की उम्मीदवार धनश्री कोलगे को हराकर जीत दर्ज की। इससे पहले वर्ष 2017 में तेजस्वी ने अविभाजित शिवसेना के टिकट पर बीएमसी के वार्ड नंबर 1 से जीत हासिल की थी। 15 दिसंबर 2025 को उन्होंने उद्धव गुट से अलग होकर बीजेपी जॉइन की थी। उनके पति अभिषेक घोसालकर की फरवरी 2024 में हत्या कर दी गई थी। अभिषेक एक बैंक के डायरेक्टर भी थे और उनकी हत्या ने मुंबई की राजनीति में बड़ा भूचाल मचा दिया था।
आरक्षण लॉटरी के बाद यह आधिकारिक तौर पर साफ हो गया है कि मुंबई का अगला मेयर ‘ओपन कैटेगरी महिला’ से होगा। इस फैसले ने सभी राजनीतिक दलों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। अब कोई भी महिला पार्षद, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से हो, मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकती है। इससे पहले बीएमसी में मेयर पद विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के पास था, इसलिए नियमानुसार इस बार इसे अनारक्षित महिला श्रेणी में रखा गया है।
हालांकि, नंबर गेम बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के पक्ष में है। मुंबई नगर निगम की कुल 227 सीटों में से बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस तरह महायुति के पास कुल 118 पार्षद हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 114 है। यानी बीजेपी-शिंदे गुट के पास बहुमत से 4 सीट ज्यादा हैं। ऐसे में दोनों दल आपसी सहमति से आसानी से अपना मेयर चुन सकते हैं।
वहीं उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 पार्षद हैं और कांग्रेस के पास 24 पार्षद। इस तरह महाविकास अघाड़ी बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे है। ऐसे में शिंदे गुट के समर्थन के बिना उद्धव ठाकरे गुट के लिए मेयर बनाना लगभग नामुमकिन है। फिलहाल शिंदे गुट बीजेपी के साथ है और मेयर पद को लेकर दोनों दलों के बीच अंदरखाने बातचीत और बार्गेनिंग भी चल रही है।
बीजेपी के भीतर भी कई महिला पार्षदों के नाम मेयर की रेस में चर्चा में हैं। तेजस्वी घोसालकर के अलावा वार्ड 13 से राणी द्विवेदी, वार्ड 14 से सीमा शिंदे, वार्ड 15 से जिज्ञासा शाह, वार्ड 16 से श्वेता कोरगावकर और वार्ड 17 से शिल्पा सांगुरे के नाम भी सियासी गलियारों में लिए जा रहे हैं।
राणी द्विवेदी बीजेपी महाराष्ट्र की सचिव और प्रवक्ता हैं और पूर्व में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। श्वेता कोरगावकर, सीमा शिंदे, जिज्ञासा शाह और शिल्पा सांगुरे भी पार्टी में सक्रिय और मजबूत महिला चेहरों के तौर पर देखी जा रही हैं।
बीएमसी में इस समय बीजेपी के पास कुल 49 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं, जबकि शिंदे गुट के पास 19 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं। ऐसे में साफ है कि अगला मेयर इन्हीं दोनों दलों में से किसी एक की महिला पार्षद होगी। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि बीजेपी और शिंदे गुट किस नाम पर मुहर लगाते हैं और किस महिला के हाथ मुंबई की सत्ता की कमान सौंपी जाती है।