केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच भाजपा ने अपने 47 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में कई अहम नाम शामिल हैं, जिनके जरिए पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को तिरुवनंतपुरम की नेमोम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पार्टी ने एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन को कझाकूट्टम सीट से मैदान में उतारा है। इन दोनों नेताओं को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा ने केरल में अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने का संकेत दिया है।
भाजपा की पहली सूची में कुछ नए और चर्चित चेहरे भी शामिल हैं। पार्टी ने के. चंद्रशेखरन को मंजेश्वर विधानसभा सीट से टिकट दिया है। वहीं भाजपा महिला मोर्चा की नेता नव्या हरिदास को कोझिकोड उत्तर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
नव्या हरिदास का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने हाल ही में केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। दरअसल यह उपचुनाव तब हुआ था जब राहुल गांधी ने वायनाड सीट छोड़ दी थी। हालांकि उस चुनाव में नव्या हरिदास को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए विधानसभा चुनाव में टिकट दिया है।
केरल की राजनीति में इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। दरअसल भाजपा की इस सूची से पहले राज्य की सत्तारूढ़ वाम गठबंधन की प्रमुख पार्टी CPI(M) माकपा ने विधानसभा चुनाव के लिए 81 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इस सूची में राज्य के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन समेत उनके मंत्रिमंडल के 11 मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं। पार्टी के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने बताया कि घोषित 81 उम्मीदवारों में से छह पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
इसके अलावा कोडुवल्ली, कोट्टक्कल, कोंडोट्टी, तिरुर और पलक्कड़ जैसे पांच निर्वाचन क्षेत्रों के लिए स्वतंत्र उम्मीदवारों के नाम जल्द घोषित किए जाएंगे। माकपा की सूची में 56 मौजूदा विधायक भी शामिल हैं, जिन्हें एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा गया है।
अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 2021 के चुनाव में केरल की कुल 140 सीटों में से वाम मोर्चे यानी एलडीएफ को बड़ी जीत मिली थी। उस चुनाव में एलडीएफ ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसे लगभग 45.4 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन को 41 सीटें मिली थीं और उसका वोट प्रतिशत करीब 39.1 रहा था।
भाजपा केरल में अभी तक बड़ी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई है, लेकिन पार्टी लगातार राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने इस बार कई प्रमुख नेताओं को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी की है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा की यह रणनीति केरल की राजनीति में कितना असर डालती है और क्या पार्टी इस बार राज्य की चुनावी तस्वीर में कोई बड़ा बदलाव ला पाती है।