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Bihar Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी कांड पर तेजस्वी यादव आगबबूला, पुलिस पर जमकर बरसे!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sun, 21 Jun 2026 03:30 AM IST

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत तिवारी की मौत का मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने राज्य सरकार और बिहार पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी की मौत पुलिस द्वारा किए गए फेक एनकाउंटर का परिणाम है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कई बार जातिगत आधार पर भी फर्जी मुठभेड़ों की घटनाएं हुई हैं, जिससे कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में केवल एनकाउंटर ही नहीं, बल्कि पुलिस थानों के भीतर भी लोगों की मौत और कथित हत्या की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने गायघाट की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे और उस मामले में वे स्वयं पीड़ित परिवार से मिलने गए थे। इसके अलावा उन्होंने मधुबनी की एक घटना का जिक्र किया, जहां कथित तौर पर थाने में पिटाई के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। तेजस्वी ने मुजफ्फरपुर जिले का भी उदाहरण देते हुए कहा कि वहां थाने के अंदर हुई मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार पुलिस पहले भी कई फर्जी एनकाउंटर कर चुकी है और भोजपुर के आरा क्षेत्र में भरत तिवारी की मौत उसी श्रृंखला का हिस्सा प्रतीत होती है।

आरजेडी नेता ने बिहार सरकार, विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि जांच में यह मामला फर्जी एनकाउंटर साबित होता है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। वहीं, इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर भी लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। भरत तिवारी की मौत के बाद परिजनों और समर्थकों ने न्याय की मांग उठाई है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजरें जांच प्रक्रिया और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस मामले ने बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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