सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ''भाजपा जाए तो निवेश आए, भाजपा जाए तो तरक्की आए। भाजपा जाए तो रोजगार आए और महंगाई कम हो.दुनिया का सबसे ताकतवर देश हम पर टैरिफ लगा रहा है.पहले के समय पर लोग दिवाली पर एक दूसरे को गिन्नी और सोने का सामान देते थे। आज कोई गरीब पूजा के लिए चांदी का सिक्का भी नहीं खरीद पा रहा है. सरकार यह बताए कि सबसे ज्यादा निवेश दक्षिण भारत में क्यों जा रहा है?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की तीखी आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार की "गलत नीतियों" के कारण ये दोनों समस्याएं चरम पर पहुंच गई हैं, जिससे आम जनता, किसान और नौजवान बुरी तरह त्रस्त हैं। वह अक्सर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG), खाद, बीज, सब्जियों और फलों जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार को घेरते हैं।
हाल के बयानों में उन्होंने कहा है कि बेतहाशा महंगाई के कारण लोगों के त्योहार "फीके" पड़ गए हैं और आम आदमी की कमर टूट गई है। उनका सीधा आरोप है कि सरकार की नीतियां आम जनता के लिए नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपतियों (पूंजीपतियों) को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया है कि चीन से बढ़ता आयात भारतीय उद्योगों को बंद कर रहा है, जिससे महंगाई और बेरोजगारी, दोनों बढ़ रही हैं। अखिलेश यादव ने हाल ही में (अक्टूबर 2025) यह गंभीर आरोप लगाया कि "नौकरी और भर्ती भाजपा सरकार के एजेंडे में ही नहीं है।"
वह उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों में होने वाले लगातार "पेपर लीक" को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर पेपर लीक कराती है ताकि युवाओं को नौकरी न देनी पड़े, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। उन्होंने बेरोजगारी को 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के आरक्षण से जोड़ा है। उनका आरोप है कि सरकार आउटसोर्सिंग (Outsourcing) के जरिए भर्तियां करके भाजपा के लोगों का "खजाना भर रही है" और पिछड़ों, दलितों का आरक्षण छीनना चाहती है।