उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ महोबा में दर्ज FIR पर ASP वंदना सिंह ने कहा, " 22 मई 2026 को सोशल मीडिया के ज़रिए एक वीडियो प्राप्त हुई। जिसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने समर्थकों के साथ जमाव करते हुए सरकारी काम में बाधा उत्पन्न की गई और आम रास्ते को अवरूद्ध किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी भी की। इस वीडियो के संबंध में महोबा में तहरीर प्राप्त हुई, जिस पर सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इस मामले में कानून के मुताबिक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"
उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "मैं महोबा गया था.एक दलित बच्ची के साथ 16 दिनों तक रेप किया गया है। उसको नशे के इंजेक्शन लगाए गए। उसके गुप्तांगों को अपराधियों ने सिगरेट से जलाया। आज उसकी बात मैंने उठाई तो भाजपा को नागवार गुजरा। AI वीडियो के माध्यम से मुझपर मुकदमा लगाया जा रहा है, मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। मैं सरकार से कहना चाहूंगा एक नहीं 100 मुकदमे लगा दो लेकिन उस दलित बच्ची को न्याय दीजिए। मैं जेल जाने को तैयार हूं। 100 मुकदमे झेलने के लिए तैयार हूं। भाजपा के नेता उस बच्ची के घर गए क्या?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ महोबा में दर्ज एफआईआर को लेकर पुलिस प्रशासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। महोबा की एएसपी वंदना सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 22 मई 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में अजय राय अपने समर्थकों के साथ बड़ी संख्या में एकत्र दिखाई दिए, जहां कथित रूप से सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की गई और आम रास्ते को अवरुद्ध किया गया। पुलिस के अनुसार इस दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
एएसपी वंदना सिंह ने यह भी कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी किए जाने का आरोप भी सामने आया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित वीडियो की जांच की गई और उसके आधार पर महोबा में तहरीर प्राप्त हुई। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने या सरकारी कार्य में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से इस कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और कानून के अनुसार की जा रही है।
फिलहाल पुलिस वीडियो की सत्यता, घटनास्थल की परिस्थितियों और वहां मौजूद लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।