भारतीय वाणिज्यिक पायलट संघ (आईसीपीए) ने रविवार को कहा कि पिछले महीने दुर्घटनाग्रस्त हुए एआई 171 विमान के चालक दल ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिम्मेदारी के साथ काम किया। चालक दल ने अपने प्रशिक्षण और कर्तव्यों का निर्वहन किया। ऐसे में पायलटों को अनुमान के आधार पर बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
पायलटों की गलती को लेकर कुछ हलकों में लगाए जा रहे आरोपों को पुरजोर तरीके से खारिज करते हुए एअर इंडिया के नैरो-बॉडी पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन ने जोर देकर कहा कि जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक कोई भी अटकलबाजी अस्वीकार्य है। ऐसे कयासों की पुरजोर तरीके से निंदा की जानी चाहिए। आईसीपीए टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया में नैरो-बॉडी बेड़े के पायलटों का निकाय है।
भारतीय एयरलाइन पायलट संघ ने भी शनिवार को एअर इंडिया विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और तथ्य-आधारित जांच की मांग की थी। उनकी ओर से दावा किया गया था कि एअर इंडिया विमान दुर्घटना की जांच का लहजा और दिशा पायलट की गलती की ओर झुकाव का संकेत देती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि रिपोर्ट में पायलट को गलत ठहराने की हड़बड़ी दिखाई देती है।
इससे पहले विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने 12 जून को हुए घातक बोइंग 787-8 विमान दुर्घटना की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। हादसे में 260 लोग मारे गए थे। रिपोर्ट में पाया गया है कि एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI171 के दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति एक सेकंड के अंतराल पर बंद हो गई, जिससे कॉकपिट में अफरा-तफरी मच गई और विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद ही अपनी ऊंचाई खोते हुए क्रैश हो गया। 15 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा गया कि कॉकपिट की वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ईंधन स्विच क्यों बंद किया। हालांकि, दूसरे पालयट ने इससे इनकार किया।