अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे में फ्लाइट का ब्लेक बॉक्स मिल चुका है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस ब्लैक बॉक्स से कुछ मिल पाएगा? विमान दुर्घटना की जांच के लिए भारत में ब्लैक बॉक्स रीडर की जरूरत होती है, लेकिन यह कोई सामान्य रीडर नहीं है. ब्लैक बॉक्स को समझने के लिए विशेष उपकरणों और विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. ब्लैक बॉक्स से काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी कि आखिर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ और इसके पीछे क्या वजह थी.ब्लैक बॉक्स को विमान का सबसे अहम पार्ट माना जाता है. आमतौर पर विमान में दो तरह के ब्लैक बॉक्स होते हैं. पहला फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) होता है जो विमान की गति, ऊंचाई, दिशा, इंजन की जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण डेटा को रिकॉर्ड करता है. दूसरा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) होता है जो पायलटों के बीच बातचीत, रेडियो प्रसारण, और कॉकपिट में अन्य आवाज को रिकॉर्ड करता है. भारत में विमान दुर्घटना की जांच के लिए ब्लैक बॉक्स रीडर को स्थापित करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की एक टीम है. इस टीम में इंजीनियर, वैज्ञानिक, और जांचकर्ता शामिल हैं जो ब्लैक बॉक्स को पढ़ने और डेटा का विश्लेषण करने के लिए प्रशिक्षित हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर ब्लैक बॉक्स जांच के लिए अमेरिका जाता है तो फिर डीजीसीए के कुछ अधिकारी भी उसके साथ जा सकते हैं. हालांकि, ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालना कोई एक दिन का काम नहीं है. यह लंबी प्रक्रिया होती है क्योंकि डेटा को रीड किया जाता है उसके बाद तय किया जाता है कि विमान में क्या खामियां आईं कि इस तरह का हादसा हो गया.एयर इंडिया की फ्लाइट AI171, जो अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रही थी, 12 जून 2025 को टेकऑफ के कुछ ही क्षणों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 230 यात्री और 12 क्रू सदस्य शामिल थे. विमान ने टेकऑफ के लगभग 30 सेकंड बाद, 650 फीट की ऊंचाई पर, एक ‘मेडे’ कॉल किया था, जो आपातकालीन स्थिति का संकेत था. इसके बाद विमान का रडार संपर्क टूट गया और वह अहमदाबाद के मेघानी नगर स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल के छात्रावास में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.