अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वाले 22 वर्षीय इरफान शेख को शनिवार को पुणे के पिंपरी चिंचवड़ में नम आंखों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इरफान एयर इंडिया की उस लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 में बतौर कैबिन क्रू मेंबर तैनात थे, जो 21 जून को टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।
इस हादसे में 241 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के साथ-साथ जमीन पर मौजूद 29 लोगों की भी मौत हो गई थी। दुर्घटना की भयावहता ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
इरफान के परिवार को उनका शव शुक्रवार देर रात डीएनए जांच के बाद सौंपा गया, जिसके बाद शनिवार सुबह शव पुणे लाया गया।
पिंपरी चिंचवड़ के नेहरू नगर स्थित कब्रिस्तान में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्य, पड़ोसी, दोस्त, और सभी राजनीतिक दलों के नेता भी मौजूद थे। वहां मौजूद हर आंख नम थी और हर दिल एक ही सवाल कर रहा था – इतनी जल्दी क्यों गया इरफान?
इरफान के एक रिश्तेदार ने बताया, “उसने दो साल पहले एयर होस्ट/कैबिन क्रू की ट्रेनिंग ली थी। सबसे पहले उसे विस्तारा एयरलाइंस में नौकरी मिली थी। फिर जब एयर इंडिया और विस्तारा का विलय हुआ, तब इरफान को इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भेजा जाने लगा। वह बेहद मेहनती और प्रोफेशनल था।”
इरफान की मां, जो अब भी सदमे में हैं, कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थीं। पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।
पड़ोसी बताने लगे – “इरफान हमेशा मुस्कुराता था। वह कहता था, एक दिन मैं बड़े पायलट्स के साथ काम करूंगा। लेकिन उसका सपना एक झटके में खत्म हो गया।”
दोस्तों और सहकर्मियों ने इरफान को याद करते हुए कहा कि उसके चेहरे पर हमेशा एक सादगी और आत्मविश्वास होता था।
उसने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर लंदन के ट्रिप की तस्वीरें शेयर की थीं। वह अपने करियर की ऊंची उड़ान के लिए उत्साहित था।
एक करीबी मित्र ने बताया –
“उसकी फ्लाइट शेड्यूल बहुत टाइट रहती थी, लेकिन वह कभी शिकायत नहीं करता था। उसका सपना था विदेश में काम करने का, और वहां से मां के लिए कुछ बड़ा करना।”
इस हादसे के बाद से कई सवाल खड़े हो रहे हैं –
• क्या एयर इंडिया के विमानों की जांच ठीक से हो रही थी?
• बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की तकनीकी स्थिति कैसी थी?
• क्या उड़ान से पहले क्रू को जरूरी अलर्ट मिला था?
इरफान जैसे कई युवा क्रू मेंबर्स इस हादसे में मारे गए, जो विमानन उद्योग में नया नाम कमाने निकले थे।
हर वो इंसान जो इरफान को जानता था, यही कह रहा है कि “बहुत जल्दी चला गया।”
उसकी जिंदादिली, ईमानदारी और प्रोफेशनलिज्म अब केवल यादें बनकर रह गए हैं।
परिवार ने सरकार से मांग की है कि इरफान जैसे हर क्रू मेंबर को शहीद का दर्जा मिले, और एयरलाइंस को सुरक्षा मानकों पर और कठोरता बरतनी चाहिए।
इरफान शेख की यह कहानी सिर्फ एक विमान हादसे में जान गंवाने वाले युवक की नहीं है,
यह उस हर युवा की कहानी है, जो सपने लेकर उड़ान भरता है, लेकिन जमीन की सच्चाई उन्हें कभी-कभी बेबस लौटा देती है।
इरफान अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उसका संघर्ष, समर्पण और मुस्कुराता चेहरा हमेशा याद रहेगा।