गगरेट विधानसभा क्षेत्र के दियोली स्थित सरकारी स्कूल में रविवार रात आए तेज तूफान ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर उजागर कर दी। अचानक चली तेज आंधी और खराब मौसम के चलते स्कूल भवन की छत पूरी तरह उड़ गई, तूफान इतना भयंकर था कि छत के टीन और अन्य सामग्री हवा में उड़कर दूर-दूर तक जा गिरी। राहत की बात यह रही कि घटना रात के समय हुई, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन इस हादसे में स्कूल के कमरों में रखा फर्नीचर, जरूरी दस्तावेज और शैक्षणिक सामग्री भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्कूल भवन अंग्रेजों के समय का बना हुआ है और लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा है। इतना ही नहीं, भवन का एक कमरा लोक निर्माण विभाग द्वारा पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई इसी खस्ताहाल भवन में चलती रही। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब स्कूल भवन के निर्माण के लिए करीब 56 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं, तो आखिर अब तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि विभागीय सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लगातार नजरअंदाज किया गया। अब तूफान ने उस लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। इस पर पूर्व उपप्रधान संदीप कुमार,(टोनी) ने कहा की सरकार को इस तरह जल्द ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर बच्चों के बैठने का स्थान ही सुरक्षित नहीं तो बच्चों अच्छी शिक्षा कैसे प्राप्त करेंगे। तरसेम जसवाल ने कहा कि 1951का बनी पाठशाला है अंग्रेजों के समय का है स्कूल बच्चों की सुरक्षित को देखते हुए जल्द ही प्रशासन को इस तरह ध्यान देना चाहिए अगर कोई भी घटना होती हैं तो उसकी जिम्मेदार प्रशासन होगा और उसके लिए में स्वयं ही कोट के दरवाजे तक जाऊंगा।