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Solan News: चार श्रम संहिताओं के खिलाफ सोलन में मजदूर-किसानों का प्रदर्शन, 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग

भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर सोलन जिला मुख्यालय में मजदूरों, किसानों और कर्मचारियों ने विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर-विरोधी और कॉरपोरेट-परस्त नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। जनसभा में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार करते हुए कई मांगें उठाईं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कोरोना काल में केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताएं थोपकर मजदूर वर्ग की कमर तोड़ दी। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का भी आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार भी इन नीतियों का समर्थन कर रही है। जनसभा को एटक के राज्य सचिव अतुल भारद्वाज, राज्य कोषाध्यक्ष अनूप परासर, सीटू जिला सोलन अध्यक्ष राकेश कुमार, डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय नौणी एटक प्रधान हेमराज, किसान नेता कुलदीप तंवर और नीतीश ठाकुर समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। चार श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं को तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने निश्चित अवधि के रोजगार को खत्म करने और सभी के लिए आठ घंटे का कार्यदिवस बहाल करने की मांग उठाई। इसके साथ ही ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल के संवैधानिक अधिकार को बहाल करने की भी मांग की गई। 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग प्रदर्शनकारियों ने योजना श्रमिकों, जिनमें आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील कार्यकर्ता शामिल हैं, के साथ दिहाड़ी मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और स्वीकृत पदों पर पक्की भर्तियां करने पर भी जोर दिया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें चारों श्रम संहिताओं को तत्काल रद्द किया जाए। निश्चित अवधि रोजगार खत्म किया जाए। सभी के लिए आठ घंटे का कार्यदिवस बहाल किया जाए। ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार बहाल किया जाए। हड़ताल के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए। आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील और दिहाड़ी मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन तय किया जाए। पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए। स्वीकृत पदों पर पक्की भर्तियां की जाएं।

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