रेणुकाजी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान छठे दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, रुकमणी विवाह और कंस वध के प्रसंगों का वर्णन किया गया। श्रोता भगवान श्री कृष्ण के बाराती बन कर झूमने पर विवश हो गए। कथा व्यास अचार्य मोहनचंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृृृृष्ण व रुकमणी विवाह के प्रसंगों का मार्मिक वृत्तांत सुना कर श्रोताओं को भावविभोर किया। भगवान श्रीकृष्ण व रुकमणी की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान मंगल व गोपी गीत के साथ बधाइयां भी सुनाई गई। मोहन चंद्र शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक जीव परमात्मा की प्रेम कृपा व सान्निध्य प्राप्त करना चाहता है, इसका सबसे सरल उपाय प्रभु चरणों की भक्ति है। संगीतमयी इस भागवत् कथा का श्रद्धालु जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। निर्वाण आश्रम के मंहत महात्मा रेणेन्द्र मुनि ने बताया कि भागवत कथा का समापन सोमवार को होगा। संगीतमयी इस भागवत कथा का श्रद्धालु ने जम कर लुत्फ उठाया। इस मौके पर संत महात्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।