मौसम में हुए बदलाव से मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फिर से तापमान में अचानक गिरावट आने से ठंड का प्रकोप बढ़ा है। सोमवार दोपहर बाद नोगवैली और आसपास के सेब बाहुल क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इसके कारण बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सेब फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, निचले क्षेत्रों में बारिश से नगदी फसलों को संजीवनी मिली है। गर्मी का एहसास शुरू हो चुका था। मटर और अन्य नगदी फसल के लिए बारिश काफी फायदेमंद साबित होगी। कृषि और बागवानी के रुके पड़े कार्य जमीन में नमी आने से शुरू होंगे। अभी निचले क्षेत्रों में सेब में पिंक बड आने के साथ फ्लावरिंग का दौर शुरू होने वाला है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब के पेड़ों में पत्ते निकलने शुरू हो चुके हैं। बागवानों के समक्ष हर साल की भांति ओलावृष्टि होने का डर सताने लगा है। प्रगतिशील बागवानों में शिशु पाल, सुंदर सिंह, बंसी लाल, यशपाल, श्याम मुरारी, जगत सिंह, राजवीर, छतर सिंह, गोविंद कायथ, कुलदीप, वीरेंद्र सिंह, विजय सिंह और कमल चाई सहित अन्य बागवानों का कहना है कि प्रकृति की चौतरफा मार के चलते साल भर की मेहनत बर्बाद होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बावजूद इसके सरकार और बागवानी विभाग का नुकसान का आंकलन कागजों तक ही सीमित रहता हैI बागवानी विभाग के तहत सब्सिडी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि छोटे और मध्यम किसान बागवान भी एंटी हेलनेट जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सके।