संयुक्त किसान मंच और केंद्रीय मजदूर संगठनों के जेल भरो आंदोलन के आह्वान पर सोमवार को बालीचौकी में किसान-मजदूरों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इसके साथ ही क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने बालीचौकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा देने की मांग की। इसके अलावा सेब सीजन शुरू होने से पहले क्षेत्र की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत करवाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सेब सीजन के दौरान सड़कें खराब होने से किसानों और बागवानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शन को हिमाचल किसान सभा राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र सिंह राणा, मिड-डे मील के पूर्व राज्य अध्यक्ष इंदर सिंह और नौजवान सभा लोकल कमेटी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर किसानों और मजदूरों में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को फसलों का लागत मूल्य से डेढ़ गुना दाम देने और मंडियों की उचित व्यवस्था करने का वादा किया गया था, लेकिन इन वादों को पूरा नहीं किया गया। वक्ताओं ने किसानों के हितों के विपरीत नीतियां बनाए जाने और कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने नए बीज कानून और श्रम संहिताओं का विरोध किया। इसके साथ ही मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित नए कानून को लेकर भी चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों ने बालीचौकी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कई बार मांगों को लेकर प्रशासन को लिखित ज्ञापन दिए गए, लेकिन समस्याओं का समाधान करना तो दूर, मांग पत्रों का जवाब तक नहीं दिया गया। महेंद्र सिंह राणा ने कहा कि लोग अपनी समस्याएं लेकर 40 से 50 किलोमीटर दूर से प्रशासन के पास पहुंचते हैं, लेकिन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय प्रशासन ने मांगों पर गौर नहीं किया तो आने वाले समय में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। प्रदर्शन में भीष्म, शकुंतला, रूपदासी, देवेंद्र कुमार, प्रकाश चंद और तिलक राज सहित कई लोग मौजूद रहे।