अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या पहाड़ी लोकगीतों और फिल्मी गीतों के नाम रही। इस दौरान हिमाचली लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। ‘किंग ऑफ नाटी’ ठाकुरदास राठी सहित कुशल वर्मा, खुशबू भारद्वाज, गीता भारद्वाज, सेस राम आजाद, हेमराज भारद्वाज और धर्मेंद्र शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। लोक गायक ठाकुरदास राठी ने ‘आसे आये तेरे पाहुणे हो’, ‘ओ बांकी चंद्रा याद रखी गल्लां मेरी’ और ‘चैटिंग-चैटिंग लगी ऋतुए’ सहित कई पहाड़ी गीत पेश किए। उनकी प्रस्तुतियों पर दर्शक झूमते नजर आए। वहीं, हिमाचली गायक कुशल वर्मा ने ‘नेऊ दिल्दू चोरी हो’, ‘इंद्रा लड़िये तेरी’ और ‘ए आये ते कोटके, ए आये सराजी’ जैसे गीतों से दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। गायिका खुशबू भारद्वाज ने ‘कजरा मोहब्बत वाला’ और ‘रोहड़ू जाना मेरी आमिये, रोहड़ू हो’ सहित कई गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। गायिका गीता भारद्वाज ने ‘गोली मारो दुनिया को’, ‘आगे ता आगे चली डोलमा सेवता’, ‘लछी-लछी लोग’, ‘झुरी रा केरना की’ और ‘आया नी प्यार निभाना’ जैसे गीतों से सांस्कृतिक संध्या में रंग जमाया। लोक गायक सेस राम आजाद ने ‘तू ठगी मेरी कंगना’, ‘शाबा शे रेरू नेगिया’, ‘तारा लाडी’ और ‘नौई पार ली शोहरिए’ सहित कई गीत पेश कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इसके अलावा हेमराज भारद्वाज ने ‘सांसों की जरूरत है जैसे’, ‘खई के पान बनारस वाला’ और ‘आई एम डिस्को डांसर’ जैसे लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत किए। लोक गायक धर्मेंद्र शर्मा ने ‘झुरी रा केरना की पीपली खाई लगी शी-शी’ सहित कई पहाड़ी गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। इस अवसर पर मिल्कफेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि तथा एपीएमसी अध्यक्ष राम सिंह मियां विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू डॉ. अमित शर्मा ने दोनों अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली लोक संस्कृति, पारंपरिक नाटी और लोकप्रिय गीतों का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दशहरा उत्सव की अंतिम शाम को यादगार बना दिया।