मणिकर्ण घाटी के जल्लूग्रां गांव में माता पार्वती के सम्मान में पारंपरिक बिरशू मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मेले की शुरुआत सुबह के समय भगवान नृसिंह मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। गांव की महिलाओं के साथ-साथ वे विवाहित बेटियां भी विशेष रूप से इस आयोजन में शामिल हुईं। सभी ने मिलकर माता पार्वती की श्रद्धा भाव से पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की। स्थानीय परंपरा के अनुसार इस धार्मिक अनुष्ठान को धूप देना कहा जाता है। इसमें महिलाएं एकत्र होकर देवी को धूप अर्पित करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। सायंकाल के समय बिरशू मेले का मुख्य आकर्षण देखने को मिला, जब सैकड़ों महिलाएं एक साथ एकत्र होकर माता के रथ के साथ पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करने लगीं। ढोल-नगाड़ों और लोक वाद्ययंत्रों की धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता पार्वती से आशीर्वाद प्राप्त किया।