बड़सर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि अपने 42 वर्ष के राजनीतिक कॅरिअर में वे हमेशा नशे के खिलाफ रहे हैं। बड़सर में चिट्टा बरामदगी मामले में पुलिस द्वारा उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ उनकी प्रतिबद्धता किसी से छिपी नहीं है। विधायक ने कहा कि धर्मशाला में नशे के खिलाफ शुरू हुई मुहिम के दौरान विपक्ष सरकार के साथ खड़ा था, लेकिन हमीरपुर में चिट्टे के खिलाफ आयोजित वॉकथॉन में न तो प्रशासन ने और न ही सरकार ने जनप्रतिनिधियों को बुलाना जरूरी समझा। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार नशे के खिलाफ मुहिम को मजबूती देना नहीं चाहती। उन्होंने यह बातें शुक्रवार को हमीरपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में कहीं। लखनपाल ने रिश्तेदार से चिट्टा बरामद होने के पुलिस दावे और पुलिस अधीक्षक हमीरपुर की ओर से सार्वजनिक रूप से उनका नाम लेने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिट्टा मामलों में कई पुलिस कर्मी भी संलिप्त पाए गए हैं, लेकिन उन पर क्या कार्रवाई हुई पुलिस का सार्वजनिक करना चाहिए। पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देकर विधायक और भाजपा को जोड़ना गलत है। विधायक ने आरोप लगाया कि बड़सर थाना क्षेत्र के आसपास सरेआम नशा बिक रहा है। इस बारे में कई बार पुलिस को सूचना देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार यदि अफसरों को दफ्तरों से बाहर भेजे तो नशे की असलियत सामने आ जाएगी। इस मामले में एसपी हमीरपुर ने किस-किस को फोन कर खबर वायरल कराने की बात कही जोकि निंदनीय है। हमीरपुर में पुलिस केवल चालान करने तक सीमित रह गई है। लखनपाल ने सवाल उठाया कि बड़सर में चिट्टा बरामदगी का दावा करने के बाद आरोपियों को तुरंत क्यों छोड़ा गया, और इस मामले में मुख्य तस्करों तक पहुंचने के प्रयास क्यों नहीं किए गए।