यमुनानगर में हरनौल पंचायत के अंतर्गत पंचतीर्थी में तीन दिवसीय मेला मंगलवार को शुरू हो गया। पहले दिन सैकड़ों श्रद्धालु मेले में पहुंचे। सुबह से देर शाम तक भी यहां स्थित प्राचीन श्रीराम-कृष्ण मंदिर धाम व पंचमुखी हनुमान मंदिर के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। यहां प्रसाद चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने मन्नतें मांगी। मंदिर के सामने लगे बेरी के पेड़ पर सुबह से शाम तक महिलाओं ने परांदा बांध मन्नतें मांगी।दोनों मंदिरों व बेरी के पेड़ के अलावा श्रद्धालुओं ने सामने बने सरोवर में भी दीपदान किया। साथ ही सरोवर के जल से आचमन किया। श्रीराम-कृष्ण मंदिर धाम में महिलाओं ने भजन कीर्तन किया। इस दौरान महिलाओं ने लोकगीत गाये और उन पर नृत्य किया। मेले में प्रसाद, खिलौनों सहित अन्य जरूरत के सामान व खान-पान की करीब डेढ़ सौ दुकानें लगीं। जहां श्रद्धालुओं खरीदारी करते नजर आए। मंदिर कमेटी की ओर से कड़ी चावल का भंडारा भी लगाया गया। मंदिर समीप बने गुरुद्वारा साहिब में भी काफी संख्या में संगत पहुंची। मेले में सुरक्षा के लिए महिला व पुरुष पुलिस तैनात रही। मंदिर कमेटी प्रधान मेहा सिंह ने बताया कि 20 व 21 नवंबर को दंगल का आयोजन होगा। साथ ही 20 नवंबर को मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने का अनुमान है, क्योंकि यहां पंचमी के दिन मुख्य स्नान होता है। तीनों दिन मंदिर की ओर से श्रद्धालुओं के लिए कड़ी चावल के भंडारे का प्रबंध रहेगा। मेले से जुड़ी मान्यताएं अज्ञातवास के दौरान यहां द्रौपदी समेत पांडव ठहरे थे। यहां बना सरोवर पांडवों का बनाया हुआ है। सरोवर में पांडवों ने अस्त्र-शस्त्र धोये थे। द्रौपदी ने यहां स्थिर बेरी के पेड़ पर धागा मन्नत मांगी थी। बेरी को दुख भंजन कहा गया। मान्यता है कि बेरी पर परांदा बांध मांगी मन्नत पूरी होती है। इसलिए मेले में हजारों श्रद्धालु खासकर महिलाएं पेड़ पर तीनों दिन परांदा बांध मन्नते मांगती हैं। मन्नतें पूरी होने पर मेले में आकर परांद खोल दिया जाता है। सरोवर में स्नान को लेकर मान्यता है कि पांच रविवार को स्नान करने से चर्म रोग दूर होता है।