वैदिक प्रवक्ता महेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने पर हवन की राख को पानी में बहाना बिल्कुल गलत है। इससे जल प्रदूषण होता है। सभी प्राणियों को जीवित रहने के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता है, इसलिए हवन की राख को बहते पानी में डालने की बजाय अपने खेत या पेड़-पौधों में डालना चाहिए। घर में रखी देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी नदियों व जलाशयों में नहीं डालना चाहिए। महेंद्र शास्त्री काठ मंडी स्थित आर्य समाज मंदिर की ओर से आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे यजुर्वेद पारायण महायज्ञ व 38वें वार्षिक उत्सव के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत आर्य समाज के पूर्व प्रधान कपिल देव, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह शास्त्री व प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने दीप प्रज्वलित करके की। महायज्ञ में वीरवार को कुलदीप राठी, ललिता, शक्ति सिंह, बबीता, अमित कुमार, मंजू, बलजीत सिंह, निधि, राहुल, मोहित छिक्कारा, ऋतु, संजीव खत्री, सीमा, आनंद कुंडू, बबीता व राकेश राणा यजमान के रूप में पहुंचे। सभी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ में आहुति दी। महेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि यजुर्वेद में उपदेश है कि सभापति या राजा को न्याय के आसन पर बैठकर धर्मयुक्त निर्णय लेना चाहिए, ताकि पात्र को इंसाफ मिल सके। न्याय के आसन पर बैठने वाले व्यक्ति को कभी भी पक्षपात नहीं करना चाहिए। मनुष्य को विद्या प्राप्त करके धर्म से पवित्र हुई वाणी बोलनी चाहिए। किसी के प्रति ईर्ष्या व द्वेष भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए, यह धर्म के विरुद्ध है। कार्यक्रम में बलजीत सिंह, जयसिंह दहिया, चांद सिंह, मंजू, नीलम, वर्षा, सीमा, सतेंद्र, जसबीर, दिलावर व दिनेश मौजूद रहे।