आपातकाल का वह काला दिन आज भी याद है। कैसे लोगों को पकड़-पकड़कर जेलों में डाला जा रहा था। किसी में कुछ बोलने की हिम्मत तक नहीं थी। जो भी कुछ बोलने को आगे आता था उसे ही पकड़कर जेल में ठूस दिया जाता था। यहां भी उनसे एक हत्या के मामलों के बंदी और कैदियों की तरह व्यवहार किया जाता था। इन सबके चलते हिम्मत नहीं हारी और न ही किसी की मनमर्जी के आगे घुटने टेके। ये कहना है कि पूर्व विधायक धर्म सिंह राठी के सुपुत्र एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी का। मूल रूप से समालखा के मनाना गांव निवासी एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी अब मॉडल टाउन में रहते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता धर्म सिंह राठी 1957-62 में विधायक रहे हैं। आपातकाल लगाते ही 24 जून की रात को सबसे पहले मेरे पिताजी को गिरफ्तार किया। यह प्रदेश में उनकी पहली गिरफ्तारी थी।