मुहर्रम पर रविवार को दरगाह कलंदर साहब से ताजिया निकाला गया। ताजिया के लिए शहर में बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस प्रशासन भी सचेत रहा। जुलूस मेन बाजार से होकर विभिन्न अखाड़ों के साथ कर्बला इमाम साहब संजय चौक पर ताजियों को दफना कर समापन हुआ। इस्लाम में मुहर्रम का बहुत महत्व होता है। इसे मोहम्मद साहब के नाती इमाम हुसैन के कर्बला की जंग में शहीद होने के गम में मनाया जाता है। इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ काम शादी-विवाह नहीं किया जाता है। एडवोकेट इरफान अली ने बताया कि मुहर्रम का महत्व इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है और मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पवित्र भी होता है। मुहर्रम से हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होना और सच्चाई उसूलों के लिए कुर्बानी देना, धैर्य, सब्र, त्याग की भावना रखना और इंसानियत की रक्षा करना आदि सीखने को मिलता है। मोहर्रम के दिन रोजा रखा जाता है और पानी व लंगर के स्टाल लगा कर पुण्य कमाते हैं। पीर कलंदर साहब से मुहर्रम का जुलूस ताजियों के साथ लाठियों का पट्टा का करतब कर गतका के साथ खेल करते हुए, हुसैन के नारों से बाजार गुंज उठा। जुलूस मेन बाजारों से होकर विभिन्न अखाड़ों के साथ कर्बला इमाम साहब संजय चौक पर ताजियों को दफना कर समापन हुआ।