खेतों में लगाई जा रही हाईटेंशन बिजली लाइनों के विरोध में पानीपत समेत छह जिलों के किसानों जिला सचिवालय पर मंगलवार को रातभर धरना दिया। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पानीपत, सोनीपत, जींद, कैथल, सिरसा और हिसार से आए सैकड़ों किसानों ने सरकार की अनदेखी पर रोष जताया। किसानों ने आरोप लगाया हाईटेंशन तार लगाने से पहले किसानों को मुआवजा देना होता है। केंद्र सरकार के आदेशों के बाद भी प्रदेश सरकार मुआवजा को लटका रही है। भारतीय किसान यूनियन किसान भवन के जिलाध्यक्ष दिलबाग बिंझौल ने कहा कि खेतों में हाईटेंशन बिजली लाइन के खंभे तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन नियमानुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। पानीपत जिले के नैन, भाऊपुर, कालखा, भादड़, खुखराना, जाटल, सुताना, नोहरा, फरीदपुर और रामगढ़ समेत करीब 12 गांवों के लगभग 400 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी हाईटेंशन लाइन बिछाई जा रही हैं। वहीं, किसानों ने मंडियों में पीआर धान के धीमे उठान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। किसानों का कहना है कि धान की खरीद के बावजूद समय पर उठान न होने के कारण उनकी फसल मंडियों में ही अटकी हुई है, जिससे उन्हें उपज का भुगतान मिलने में भी भारी देरी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर भुगतान न मिलने से किसानों को अगली फसल की बुआई और अपने घरेलू खर्चों का प्रबंधन करने में आर्थिक तंगी व परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी इन दोनों प्रमुख मांगों का स्थाई समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष और विरोध जारी रहेगा। बुधवार दोपहर बाद होने वाली बैठक में प्रशासन के रुख को देखते हुए आंदोलन की अगली रूपरेखा तैयार की जाएगी।