हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गांव चितलांग निवासी हवलदार महेश कुमार ने 29 अक्तूबर 2002 को ऑपरेशन रक्षक के दौरान जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में दुश्मनों के साथ लौहा लेते हुए अपनी शहादत दी थी। उनकी शहादत दीपावली के हुई तो पूरे गांव ने पंच पर्व नहीं मनाया था। दीपावली के दिन किसी भी घर में दीप नहीं जला था। हवलदार महेश कुमार की वीरांगना राजेश देवी को संयुक्त परिवार से सहारा मिला तो अपने दोनों बेटों को अलग-अलग सरकारी विभागों में क्लर्क बना दिया। महेश कुमार ही शहादत के समय उनकी सबसे बड़ी बेटी शालू महज आठ साल, बड़ा बेटा राजीव महज चार वर्ष और छोटा बेटा संजय सिंह एक वर्ष का था।