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कुरुक्षेत्र: दाखिले जारी, छात्रावास पोर्टल बंद; मेधावी छात्राओं के वंचित होने पर उठे सवाल

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) में महिला छात्रावासों के कमरा आवंटन को लेकर सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। संयुक्त छात्र मोर्चा सोमवार को सुबह 10 बजे आवंटन प्रक्रिया में कथित अनियमितता, पारदर्शिता की कमी और मेरिट सूची में धांधली, दूरी व आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भड़क गया। इसके बाद कुलपति कार्यालय का घेराव किया। इससे पहले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने महिला छात्रावास की चीफ वार्डन के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन छात्रावास का पोर्टल बंद कर दिया गया है। छात्र नेताओं ने दावा किया कि रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास में करीब 100 सीटें खाली होने के बावजूद जरूरतमंद और मेधावी छात्राओं को कमरा नहीं मिल रहा। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सीटें उपलब्ध हैं तो नए दाखिला लेने वाली छात्राओं के लिए पोर्टल दोबारा क्यों नहीं खोला जा रहा। कुछ देर बाद छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कराने और जांच के आधार पर आगे का फैसला लेने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र अपनी कक्षा में लौट गए। छात्र प्रतिनिधियों ने लौटते हुए चेतावनी दी कि प्रशासन द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासनों को अब निर्धारित समय-सीमा में धरातल पर उतारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन पर उतरने को मजबूर होंगे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता मनदीप बिश्नोई ने कहा कि महिला छात्रावास चीफ वार्डन की नियत में खोट है, जिसके कारण छात्राओं को बार-बार चीफ वार्डन कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और इसके बावजूद कमरे खाली होते हुए भी उन्हें छात्रावास के कमरों के सीट नहीं मिल पा रही हैं। वहीं उन्होंने कहा कि छात्रावास आवंटन के नियमों को ताक पर रखकर कमरे दिए गए हैं। मनदीप ने दावा किया कि आस-पास की छात्राओं को छात्रावास में सीट दे दी गई है। इससे चीफ वार्डन की कार्यशैली शक के गहरे में है। इसलिए तुरंत प्रभाव से चीफ वार्डन को अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए व जांच के बाद खामियां मिलने पर उनकी जबावदेही तय करके विश्वविद्यालय प्रशासन को उनके खिलाफ उचित बनती कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मौक पर रितु कांटिवाल, मधु, गौरव, आदित्य गेरवाल, शुभम राणा, हरविंदर और आरजू सहित अन्य छात्र प्रतिनिधियों ने आंदोलन में भाग लिया। आरोप बेबुनियाद, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होता है आंवटन : डॉ. कुसमलता महिला छात्रावास की चीफ वार्डन डॉ. कुसमलता ने छात्रों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि कमरा आवंटन में विश्वविद्यालय स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है। उनका नियम है कि पहले आओ पहले पाओ। इसी के आधार पर छात्राओं को कमरे दिए गए हैं। उनके अनुसार छात्रावासों में विभागवार सीटें निर्धारित की जाती हैं और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी जाती है। इसके बाद विभागाध्यक्ष की सिफारिश के आधार पर छात्राओं को कमरे आवंटित किए जाते हैं। चीफ वार्डन ने कहा कि उनके स्तर पर दूरी के आधार पर कमरा देने का कोई नियम नहीं है। उनका दावा है कि विभागों की ओर से मेरिट के आधार पर छात्राओं की सिफारिश की गई और उसी के अनुसार आवंटन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल छात्रावासों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया दूर-दराज के बच्चों को लिए जो वार्डन आवास बनाए गए हैं। उनमें से खाली पड़े आवासों को प्रशासन से लिया जा रहा है अबतक तीन आवास मिल गए है। वह कुछ और लेने के लिए प्रयास किया जा रहा है। फिर एक और व्यवस्था बनाकर दूर-दराज से आई वंछित छात्राओं के लिए उनमें रखने की व्यवस्था की जाएगें। छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें - छात्रावास सुविधा प्राप्त करने वाली छात्राओं का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए। - छात्राओं के घर और विश्वविद्यालय से दूरी को स्पष्ट किया जाए। - मेरिट और आरक्षण नीति के आधार पर आवंटन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए। - तीन अगस्त के बाद दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास पोर्टल दोबारा खोला जाए। - दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए प्राथमिकता और अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था की जाए। - पोर्टल की तकनीकी खामी के कारण दो बार फीस कटने वाली छात्राओं की राशि वापस की जाए।

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