झज्जर। देहरादून आईएमए में ट्रेनिंग के दौरान जंगल कैंप में 12 किलोमीटर की दौड़ लगाने के बाद बेसुध हुए कासनी गांव निवासी कैडेट निशांत धनखड़ की दिल्ली के आरआर अस्पताल में उपचार के दौरान शनिवार को मृत्यु हो गई। उनके अधिकतर शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और दिमाग में खून का रिसाव ज्यादा हो गया था, जिस कारण उनकी जान नहीं बची। रविवार को गांव कासनी में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। बादली से विधायक कुलदीप वत्स, जिला प्रशासन की ओर से झज्जर के नायब तहसीलदार अंशुल व जिला सैनिक बोर्ड की ओर से सूबेदार राजेश ने दिवंगत कैडेट निशांत के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया। पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ कैडेट निशांत का अंतिम संस्कार किया गया। निशांत का पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा तो परिजनों की आंखें नम हो गईं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सैन्य टुकड़ी ने सशस्त्र झुकाकर कैडेट निशांत धनखड़ को ''गार्ड ऑफ ऑनर'' देकर अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आसपास के गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने नम आंखों से निशांत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि निशांत बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे। उनका असमय चले जाना पूरे क्षेत्र और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। निशांत के चाचा सतेंद्र धनखड़ ने बताया कि लगभग 4 माह पहले ही निशांत सेना में बतौर लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुआ था। गत 9 जुलाई को निशांत ट्रेनिंग के लिए देहरादून आईएमए में गए थे। गत 9 अगस्त को देहरादून में चल रही ट्रेनिंग के जंगल कैंप के दौरान 12 किलोमीटर की दौड़ लगाई है। दौड़ के दौरान कई कैडेट्स गिर पडे़ थे। उनमें से तीन की हालत ज्यादा गंभीर थी, जिसमें निशांत भी था। उसके बाद वहां के स्थानीय अस्पताल लाया गया था, जहां दो कैडेट्स ने रिकवर कर लिया था, लेकिन निशांत की हालत बिगड़ रही थी। उसके बाद वहां के अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर भी हालत में सुधार नहीं हुआ और अधिकतर अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उसके बाद एयरलिफ्ट कर पहले चंडीगढ़ और उसके बाद दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को निशांत ने दम तोड़ दिया। 10 को पहुंच गया था परिवार देहरादून 9 अगस्त को ही परिवार के पास निशांत के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना पहुंच गई थी। उसके बाद परिवार के सदस्य भी 10 अगस्त की सुबह देहरादून पहुंच गए थे। निशांत की बहन भी श्रीनगर से सीधा देहरादून पहुंच गई थी। इकलौता बेटाा था निशांत, तीन पीढि़यों से चला रहा सैन्य सेवा का गौरव निशांत इकलौता लड़का था। उनकी एक बड़ी बहन अंशिता धनखड़ भी भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर सेवाएं दे रही हैं। उनका चयन करीब दो वर्ष पूर्व हुआ था। उनकी पोस्टिंग श्रीनगर में है। शहीद निशांत धनखड़ का परिवार तीन पीढ़ियों से सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है। उनके पिता बिरेंद्र धनखड़ उर्फ बिल्लू का एक दिसंबर 2015 को आकस्मिक निधन हो गया था। वह पोस्टमैन थे। परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस परिवार ने देश को कई सैन्य अधिकारी दिए हैं। शहीद निशांत धनखड़ के दादा रामसिंह भूतपूर्व सैनिक रहे हैं। परिवार में उनके चाचा सुनील धनखड़ कर्नल के पद पर हैं। बड़े ताऊ नरेंद्र धनखड़ भारतीय वायुसेना से फ्लाइंग ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके ताऊ के पुत्र अविनाश धनखड़ लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। परिवार की बहू अनन्या धनखड़ मेजर के पद पर हैं जबकि बेटी अक्षिता धनखड़ फ्लाइंग ऑफिसर हैं। एक अन्य चाचा सत्येंद्र धनखड़ भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं।