हांसी। हांसी के गांव रामपुरा में यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। सीआईए पुलिस से सूचना मिलने के बाद कृषि विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर एक गोदाम की जांच की। कृषि अधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार के अनुसार, मौके पर एचयूआरएल के यूरिया खाद के बैगों को दूसरे सफेद रंग के बैगों में ट्रांसफर किया जा रहा था। इन सफेद बैगों पर फॉर इंडस्ट्रियल पर्पज यूज ओनली लिखा हुआ था। जांच के दौरान गोदाम में मौजूद केयरटेकर सोनू, पुत्र सुंदर सिंह, को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने प्रदीप नाम के व्यक्ति का हवाला देते हुए बताया कि उसने उसे गोदाम में काम के लिए रखा हुआ है। कृषि अधिकारी के मुताबिक, संबंधित गोदाम विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला और न ही उसका लाइसेंस होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में खाद की कालाबाजारी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मामले में वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच के बाद स्पष्ट होगी। वही सीआईए जांच अधिकारी कपिल ने बताया कि मौके पर खाली बैगों की गिनती की गई, जिनकी संख्या लगभग 1,300 के आसपास है। वहीं, औद्योगिक उपयोग के टैग वाले सफेद बैगों की संख्या करीब 650 से 700 के बीच बताई गई है। इनकी गिनती अभी जारी थी। इसके अलावा एचयूआरएल के यूरिया खाद से भरे बैग भी मिले हैं, जिनकी कीमत करीब 266 रुपये प्रति कट्टा बताई गई। कृषि अधिकारी के अनुसार, किसान को यूरिया का एक कट्टा सब्सिडी पर 266.50 रुपये में मिलता है। विभाग की ओर से मामले में शिकायत दर्ज कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में खाद किसके निर्देश पर रखी गई थी और उसे औद्योगिक उपयोग वाले बैगों में क्यों भरा जा रहा था, इसकी जांच सीआईए पुलिस करेगी।