राखीगढ़ी के सात टीलों की सीमाओं का विस्तार किया जाएगा। टीलों की खोदाई के दौरान वह कितनी दूरी तक इनकी सीमाएं फैली थी। इसको लेकर अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी पता लगाएंगे कि साताें टीलों पर सभी सभ्यता एक ही शहर के तौर पर थी या यह अलग-अलग पहचान वाले छोटे शहर थे। दूर के टीले सेटेलाइट टाउन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।इस अनुमान की प्रमाणिकता की खोज तथा इसके वैज्ञानिक आधारित पहुलओं पर भी शोध होगा। राखी गढ़ी के दो नए टीलों की अधिसूचना भी जल्द ही कराई जाएगी। भारतीय पुरातत्व विभाग इसके लिए केंद्र सरकार तथा प्रदेश सरकार से अनुरोध करेगा। राखीगढ़ी का पुरातात्विक एरिया करीब 350 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसकी अधिसूचना केंद्र सरकार की ओर से हुई थी। कुछ समय पहले यहां राखीगढ़ी के इस एरिया से ढाई से तीन किलोमीटर दूर राखी शाहपुर तथा गामड़ा गांव के पास दो नए टीले चिहिन्त किए गए हैं।जिसके बाद इसे 550 एकड़ तक में फैले होने की संभावना जताई गई है। जिनको अभी अधिसूचित नहीं किया गया है। इन टीलों के अधिसूचित होने के बाद यहां निर्माण कार्य पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा। राखीगढ़ी में दिवाली- छठ पूजा के बाद इस सत्र की खोदाई शुरु होगी। नए सत्र से शुरु होने वाली खोदाई में टीले की सीमाएं तय करने का प्रयास किया जाएगा। जिसके चलते खोदाई गहराई की बजाए लंबाई के आकार में करने की प्राथमिकता रहेगी। जिसमें पुरातत्व सीमाएं तय होने के बाद यहां जल ससांधन की पहचान की जाएगी। यह भी पता किया जाएगा कि यह सभी टीले एक ही बड़े शहर का हिस्सा हैं या अलग- अलग छोटे शहर थे। इनका आपस में क्या संबंध था। यहां सभी टीलों में मिलने वाली धरोहरों का आपस में मिलान का काम भी होगा। जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या यह एक समान हैं ? इनके बीच कितना अंतर है।